मैकाय में ऑस्ट्रेलिया ने पारी और 51 रन से जीता टेस्ट, दोनों पारियों में 100 का आंकड़ा नहीं छू सका बांग्लादेश
नई दिल्ली: AUS vs BAN Test ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच मैकाय में खेला गया दूसरा टेस्ट महज दो दिन में खत्म हो गया। ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को पारी और 51 रन से हराकर दो मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर कर दी। मैच में बांग्लादेश की टीम पहली पारी में सिर्फ 64 रन और दूसरी पारी में 95 रन पर सिमट गई। ऑस्ट्रेलिया की ओर से मिशेल स्टार्क ने मैच में 10 विकेट लेकर बड़ी भूमिका निभाई।
मैच के जल्दी खत्म होने के बाद अब बहस सिर्फ बांग्लादेश की बल्लेबाजी पर नहीं, बल्कि पिच की गुणवत्ता और उसे मिलने वाली रेटिंग पर भी हो रही है। भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने इसी मुद्दे को उठाते हुए टेस्ट पिचों के आकलन में कथित दोहरे मापदंड पर सवाल खड़े किए हैं।
गावस्कर ने पिचों को लेकर क्या सवाल उठाया?
अपने Sportstar कॉलम में गावस्कर ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि पिछले कुछ वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में चार टेस्ट मैच दो दिन के भीतर समाप्त हो चुके हैं। इसके बावजूद, उनका कहना है कि ऐसी पिचों को लेकर वह आलोचना देखने को नहीं मिलती, जो भारतीय उपमहाद्वीप में टेस्ट जल्दी खत्म होने पर अक्सर सुनाई देती है।
गावस्कर का तर्क सीधा है—अगर किसी टेस्ट में दोनों टीमों के बल्लेबाज बड़ी साझेदारियां बनाने में लगातार नाकाम रहे हैं, तो सिर्फ बल्लेबाजों की तकनीक को जिम्मेदार मानकर पिच की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यही सवाल अब मैकाय टेस्ट के संदर्भ में भी उठ रहा है।
मैकाय में आखिर हुआ क्या?
मैकाय टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी की। बांग्लादेश की पहली पारी महज 64 रन पर खत्म हो गई। मिशेल स्टार्क ने 6 विकेट लेकर मेहमान टीम की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।
ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी भी पूरी तरह आसान नहीं रही। बांग्लादेश के शोरिफुल इस्लाम ने शानदार गेंदबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को परेशान किया और सात विकेट हासिल किए। ऑस्ट्रेलिया की ओर से कैमरन ग्रीन के 67 रन सबसे महत्वपूर्ण रहे।
इसके बाद बांग्लादेश दूसरी पारी में 95 रन ही बना सका। ऑस्ट्रेलिया ने पारी और 51 रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया।
यानी मैच में गेंदबाजों का दबदबा दोनों तरफ रहा। यही पहलू गावस्कर के सवाल को और महत्वपूर्ण बनाता है।
क्या सिर्फ खराब बल्लेबाजी को जिम्मेदार ठहराना सही है?
टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों के लिए मददगार पिच होना कोई असामान्य बात नहीं है। ऑस्ट्रेलिया की परिस्थितियों में उछाल और गति का इस्तेमाल करना वहां की क्रिकेट संस्कृति का हिस्सा रहा है।
लेकिन सवाल यह है कि पिच में गेंदबाजों के लिए मदद कितनी ज्यादा हो सकती है।
अगर पहले ही दो दिनों में मैच खत्म हो जाए और दोनों टीमों की बल्लेबाजी लगातार संघर्ष करती नजर आए, तो पिच की प्रकृति पर चर्चा होना स्वाभाविक है। गावस्कर का यही कहना है कि बल्लेबाजों की तकनीकी कमियों और पिच के प्रभाव के बीच अंतर करना जरूरी है।
भारत की पिचों पर क्यों उठता रहा है सवाल?
टेस्ट क्रिकेट में भारतीय पिचों को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। जब भारत में मैच स्पिन के अनुकूल पिच पर जल्दी खत्म होता है, तो पिच की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं और मैच रेफरी की रेटिंग भी चर्चा में आ जाती है।
गावस्कर का सवाल इसी तुलना से जुड़ा है। उनका मानना है कि अगर भारत में कम समय में खत्म होने वाले टेस्ट को पिच के नजरिए से जांचा जाता है, तो ऑस्ट्रेलिया में भी उसी तरह का निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए।
यह किसी एक देश की पिच को निशाना बनाने से ज्यादा एक समान मानदंड लागू करने का सवाल है।
ऑस्ट्रेलिया में पहले भी दो दिन में खत्म हुए टेस्ट
मैकाय का टेस्ट ऑस्ट्रेलिया में हाल के वर्षों में ऐसा पहला मुकाबला नहीं है। गावस्कर ने अपने कॉलम में बताया कि वहां पिछले कुछ वर्षों में चार टेस्ट दो दिन के भीतर समाप्त हुए हैं। इनमें पिछले साल एशेज के पर्थ और मेलबर्न टेस्ट भी शामिल थे।
इस आंकड़े के बाद बहस और गंभीर हो जाती है कि क्या बेहद तेज नतीजे को केवल टीमों के प्रदर्शन से समझा जाए या पिच की भूमिका को भी उतनी ही गंभीरता से देखा जाए।
ICC की पिच रेटिंग पर भी नजर
टेस्ट मैचों के बाद पिच की गुणवत्ता का आकलन मैच रेफरी और संबंधित क्रिकेट संस्थाओं की प्रक्रिया का हिस्सा होता है। यही वजह है कि गावस्कर की टिप्पणी केवल मैकाय की पिच तक सीमित नहीं है। वह व्यापक रूप से ICC के पिच मूल्यांकन मानकों की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।
हालांकि, किसी पिच को खराब या अनफिट घोषित करने के लिए सिर्फ मैच की अवधि ही पर्याप्त आधार नहीं होती। गेंदबाजों का प्रदर्शन, बल्लेबाजों की तकनीक, मौसम, परिस्थितियां और पूरे मैच का स्वरूप भी देखा जाता है।
टेस्ट क्रिकेट के लिए बड़ा सवाल
मैकाय टेस्ट का दो दिन में खत्म होना टेस्ट क्रिकेट के लिए भी एक दिलचस्प सवाल खड़ा करता है। पांच दिन के लिए निर्धारित मुकाबला अगर लगातार जल्दी खत्म होने लगे, तो दर्शकों, प्रसारकों और क्रिकेट बोर्डों के लिए भी इसका असर हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया में दो दिन के टेस्ट की बढ़ती संख्या को लेकर क्रिकेट जगत में पहले से चर्चा चल रही है।
गावस्कर की टिप्पणी ने इस बहस को एक और दिशा दे दी है—पिच कैसी होनी चाहिए और उसके मूल्यांकन का पैमाना सभी देशों के लिए समान क्यों नहीं होना चाहिए?
मैकाय टेस्ट का नतीजा भले ही ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में रहा हो, लेकिन मैच खत्म होने के बाद शुरू हुई यह पिच बहस अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही।
