छत्तीसगढ़ में BOT मॉडल पर सड़क निर्माण और अंडा बालोद रोड परियोजना

छत्तीसगढ़ में अब BOT मॉडल पर बनेंगी सड़कें, अंडा-बालोद मार्ग से होगी शुरुआत

निजी कंपनियां करेंगी सड़क निर्माण में निवेश, तय अवधि तक टोल वसूलने के बाद सरकार को सौंपेंगी सड़क

रायपुर। छत्तीसगढ़ में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य में अब चुनिंदा सड़कों के निर्माण के लिए BOT मॉडल BOT यानी Build-Operate-Transfer मॉडल लागू करने की तैयारी है। इस व्यवस्था के तहत निजी कंपनियां अपने निवेश से सड़क का निर्माण करेंगी और तय अवधि तक उसका संचालन करते हुए टोल के जरिए अपनी लागत और निवेश की भरपाई करेंगी। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद सड़क सरकार को सौंप दी जाएगी।

इस नई व्यवस्था को खासतौर पर माइनिंग और इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके लिए छत्तीसगढ़ हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड को एजेंसी की जिम्मेदारी दिए जाने की तैयारी है।

निजी कंपनियां लगाएंगी पैसा

BOT मॉडल में सड़क बनाने के लिए सरकार को पूरी निर्माण लागत एक साथ खर्च नहीं करनी पड़ेगी। निजी कंपनी सड़क परियोजना में अपना पैसा लगाएगी और निर्माण कार्य पूरा करेगी। इसके बाद निर्धारित अवधि तक कंपनी सड़क का संचालन और रखरखाव करेगी।

इस दौरान सड़क पर चलने वाले पात्र कमर्शियल और सार्वजनिक वाहनों से टोल वसूला जाएगा। इसी टोल से निजी कंपनी अपने निवेश और परियोजना से जुड़े खर्च की भरपाई करेगी।

तय अवधि पूरी होने के बाद सड़क का संचालन और स्वामित्व सरकार को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। इस तरह सरकार और निजी क्षेत्र की भागीदारी से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

माइनिंग और इंडस्ट्रियल क्षेत्रों को मिलेगा फायदा

छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य है और यहां कई बड़े औद्योगिक एवं खनन क्षेत्र मौजूद हैं। इन क्षेत्रों में भारी वाहनों की आवाजाही अधिक होने के कारण मजबूत सड़क नेटवर्क की जरूरत लगातार बनी रहती है।

BOT मॉडल के जरिए ऐसी सड़कों के निर्माण और रखरखाव को गति देने की योजना है। इससे खनन और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े परिवहन को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। साथ ही सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव पर भी निजी एजेंसी की जिम्मेदारी रहेगी।

अंडा-बालोद सड़क से होगी शुरुआत

इस मॉडल के तहत सबसे पहले अंडा से बालोद तक करीब 45 किलोमीटर लंबी सड़क को विकसित किए जाने की योजना है। यह परियोजना छत्तीसगढ़ में BOT मॉडल के इस्तेमाल की शुरुआती परियोजनाओं में शामिल होगी।

अंडा-बालोद मार्ग के निर्माण के लिए निजी निवेश और टोल आधारित मॉडल अपनाया जाएगा। परियोजना की शर्तों के अनुसार निजी कंपनी सड़क का निर्माण करने के बाद निर्धारित समय तक टोल वसूल सकेगी। इसके बाद सड़क सरकार को हस्तांतरित कर दी जाएगी।

सरकार पर वित्तीय दबाव कम करने की कोशिश

BOT मॉडल का एक बड़ा उद्देश्य बड़े सड़क प्रोजेक्ट में सरकार पर तत्काल पड़ने वाले वित्तीय दबाव को कम करना है। सरकार की ओर से नीति और नियामकीय व्यवस्था तैयार की जाएगी, जबकि निजी क्षेत्र निर्माण के लिए पूंजी उपलब्ध कराएगा।

हालांकि, इस मॉडल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि परियोजनाओं की लागत, टोल दर, अनुबंध की अवधि, सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव की शर्तें कितनी पारदर्शी तरीके से तय की जाती हैं।

छत्तीसगढ़ में BOT मॉडल के लागू होने से सड़क निर्माण के क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अंडा-बालोद सड़क परियोजना के अनुभव के आधार पर भविष्य में राज्य की अन्य माइनिंग और इंडस्ट्रियल क्षेत्रों की सड़कों को भी इसी मॉडल से विकसित करने का रास्ता खुल सकता है।

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