आयकर विभाग की जांच चौथे दिन भी जारी, फर्जी धर्मार्थ ट्रस्टों के नेटवर्क और विदेश भेजे गए CSR फंड की पड़ताल
आगरा: CSR फंड के इस्तेमाल और विदेशों में रकम भेजने से जुड़े एक बड़े मामले में आयकर विभाग की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। ताजगंज के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत देशभर के 36 सीए और 394 कंपनियों व ट्रस्टों पर चल रही जांच के दौरान अधिकारियों को अब तक 2 हजार से ज्यादा संदिग्ध सर्टिफिकेट मिलने की बात सामने आई है। जांच के दायरे में आए दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल से कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट पर नियमों का पालन किए बिना प्रमाणपत्र जारी करने का आरोप है। शुरुआती जांच में कथित तौर पर फर्जी धर्मार्थ ट्रस्टों के एक बड़े नेटवर्क का भी पता चला है।
फॉर्म 15CB को लेकर उठे सवाल
विदेशी भुगतान या रकम भेजने से पहले कई मामलों में संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की जांच और सत्यापन जरूरी होता है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कुछ सीए ने उचित जांच किए बिना फॉर्म 15CB सर्टिफिकेट जारी कर दिए।
आयकर विभाग की शुरुआती जांच में ऐसे कई प्रमाणपत्र सामने आने की बात कही गई है, जिनकी वैधता और उनके आधार पर किए गए लेनदेन को लेकर संदेह है।
अधिकारियों की जांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन सर्टिफिकेट को किस प्रक्रिया के तहत जारी किया गया और इनके आधार पर कितनी रकम विदेश भेजी गई।
फर्जी धर्मार्थ ट्रस्टों के नेटवर्क का दावा
जांच के दौरान अधिकारियों को कथित तौर पर फर्जी धर्मार्थ ट्रस्टों के एक बड़े नेटवर्क का पता चला है। रिपोर्ट के अनुसार, इन संस्थाओं के नाम पर भारी-भरकम फंड भेजे गए, लेकिन उनके वित्तीय रिकॉर्ड और वास्तविक गतिविधियों के बीच कथित तौर पर अंतर दिखाई दिया।
खास तौर पर जांच एजेंसियों को कुछ संस्थाओं के फंड और उनके बताए गए टर्नओवर में कोई स्पष्ट मेल नहीं मिला। इससे यह संदेह पैदा हुआ कि कुछ ट्रस्टों और कंपनियों का इस्तेमाल केवल वित्तीय लेनदेन के लिए किया जा रहा था।
हालांकि, जांच अभी जारी है और किसी संस्था या व्यक्ति की अंतिम जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी।
CSR फंड को विदेश भेजने और वापस लाने का आरोप
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू CSR फंड को विदेश भेजने और फिर उसे भारत वापस लाने से जुड़ा बताया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि CSR के नाम पर रकम पहले कुछ संस्थाओं या ट्रस्टों के जरिए विदेश स्थित शेल कंपनियों तक भेजी जाती थी। इसके बाद कथित तौर पर इस रकम को अलग-अलग माध्यमों से वापस भारत लाने की कोशिश की जाती थी।
अधिकारियों को संदेह है कि कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित संस्थाओं का इस्तेमाल भी इस प्रक्रिया में किया गया। जांच में ऐसी 117 इकाइयों का उल्लेख सामने आया है, जिनकी भूमिका अब जांच के दायरे में है।
‘अकॉमोडेशन एंट्री’ की भी जांच
आयकर विभाग इस मामले में कथित अकॉमोडेशन एंट्री की भूमिका की भी जांच कर रहा है। आसान भाषा में समझें तो अकॉमोडेशन एंट्री ऐसी व्यवस्था को कहा जाता है, जिसमें वास्तविक आर्थिक लेनदेन के बजाय कागजों पर लेनदेन दिखाकर रकम को एक वैध लेनदेन का रूप देने की कोशिश की जाती है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि योगदान के बदले ऐसी एंट्री की जा रही थी। अब जांच अधिकारी संबंधित कंपनियों, ट्रस्टों, सीए और अन्य पक्षों के वित्तीय रिकॉर्ड को आपस में मिलाकर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
करीब 5 हजार करोड़ रुपये विदेश भेजे जाने का अनुमान
जांच से जुड़े सबसे बड़े दावों में से एक CSR फंड की कथित तौर पर करीब ₹5,000 करोड़ की रकम विदेश भेजे जाने का है।
यदि जांच में यह रकम और पूरा नेटवर्क सही पाया जाता है, तो मामला वित्तीय निगरानी और CSR फंड के इस्तेमाल को लेकर बेहद गंभीर हो सकता है। फिलहाल अधिकारियों की जांच का मुख्य उद्देश्य रकम के वास्तविक स्रोत, लाभार्थियों, विदेशी कंपनियों और भारत में वापस आने वाले पैसों के बीच संबंध स्थापित करना है।
36 CA और 394 कंपनियां-ट्रस्ट जांच के घेरे में
इस मामले में जांच का दायरा केवल कंपनियों या ट्रस्टों तक सीमित नहीं है। देशभर के 36 चार्टर्ड अकाउंटेंट और 394 कंपनियों व ट्रस्टों की गतिविधियां भी जांची जा रही हैं।
आयकर विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि संदिग्ध सर्टिफिकेट जारी करने, विदेशी लेनदेन और कथित अकॉमोडेशन एंट्री में अलग-अलग पक्षों की क्या भूमिका रही।
जांच के चौथे दिन भी अधिकारियों की कार्रवाई जारी रहने की बात सामने आई है। आने वाले दिनों में दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद मामले की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
महत्वपूर्ण: इस रिपोर्ट में सामने आए आरोप और आंकड़े उपलब्ध समाचार रिपोर्ट पर आधारित हैं। जांच जारी है, इसलिए संबंधित व्यक्ति, कंपनी या ट्रस्ट की भूमिका को अंतिम रूप से दोष सिद्ध नहीं माना जा सकता।
