1 माह का मासूम चोरी कर भागी महिला गिरफ्तार: अस्पताल में भरोसा जीतकर बच्चे को लेकर हुई थी फरार, जशपुर पुलिस ने सकुशल बरामद किया बच्चा

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जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक माह के नवजात बच्चे की चोरी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। शासकीय अस्पताल से बच्चे को बहला-फुसलाकर ले जाने वाली महिला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी महिला के कब्जे से मासूम बच्चे को सकुशल बरामद कर उसके परिजनों को सौंप दिया गया है। इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी जांच ने अहम भूमिका निभाई।

इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती था परिवार

बच्चे की माँ की तबीयत खराब होने के कारण उसे उपचार के लिए जशपुर के शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार के सदस्य भी अस्पताल परिसर में मौजूद थे। इसी दौरान आरोपी महिला ने परिवार से संपर्क बढ़ाया और धीरे-धीरे उनका विश्वास जीत लिया।

परिजनों ने पुलिस को बताया कि महिला लगातार उनके संपर्क में रहती थी और बच्चे की बीमारी को लेकर चिंता जताती थी। उसने दावा किया कि वह झाड़-फूंक और पारंपरिक तरीके से बच्चे का इलाज कर सकती है। इसी बहाने उसने परिवार से नजदीकी बढ़ा ली।

खाना खिलाने के बहाने ले गई होटल

जांच में सामने आया कि आरोपी महिला ने बच्चे की माँ और दादी को खाना खिलाने के बहाने अस्पताल से बाहर चलने के लिए कहा। वह उन्हें जशपुर बस स्टैंड के पास स्थित एक होटल में ले गई। परिवार के लोग जब भोजन कर रहे थे, उसी दौरान आरोपी महिला बच्चे को गोद में लेकर वहाँ से फरार हो गई।

कुछ देर बाद जब परिजनों को महिला और बच्चे के गायब होने का पता चला, तो हड़कंप मच गया। परिवार ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी कोतवाली जशपुर में अज्ञात महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।

पुलिस ने बनाई विशेष टीम

घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए जशपुर के डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने अस्पताल परिसर और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले।

फुटेज में एक संदिग्ध महिला बच्चे को लेकर जाते हुए दिखाई दी। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, स्थानीय मुखबिर तंत्र और डिजिटल सर्विलांस की मदद से आरोपी की पहचान और लोकेशन का पता लगाया।

गांव से बरामद हुआ बच्चा

जांच के दौरान पुलिस टीम आरोपी महिला तक पहुंचने में सफल रही। आरोपी की पहचान तारा बाई (35 वर्ष), निवासी दातूनपानी, चौकी पंडरापाठ, थाना बगीचा, जिला जशपुर के रूप में हुई। उसे उसके गाँव दातूनपानी से हिरासत में लिया गया। तलाशी के दौरान पुलिस को एक माह का बच्चा भी उसके कब्जे से सकुशल मिल गया।

बच्चे के सुरक्षित मिलने की खबर मिलते ही परिवार ने राहत की सांस ली। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चे को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया।

पूछताछ में सामने आई चौंकाने वाली कहानी

पुलिस पूछताछ में आरोपी महिला ने जो खुलासा किया, उसने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया। आरोपी ने बताया कि उसकी तीन शादियाँ हो चुकी हैं। पहली शादी से उसके बच्चे हैं, लेकिन बाद की दो शादियों से उसे संतान नहीं हुई।

महिला ने बताया कि कुछ समय पहले वह गर्भवती हुई थी, लेकिन गर्भपात हो जाने के कारण वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी। इसी वजह से उसने बच्चा चोरी करने की योजना बनाई। वह कई दिनों से अस्पतालों के आसपास घूम रही थी और ऐसे परिवार की तलाश कर रही थी जिसके साथ वह आसानी से घुल-मिल सके।

गंभीर धाराएँ जोड़कर भेजा जेल

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3) भी जोड़ी। आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि बच्चे को सुरक्षित बरामद करना इस मामले की सबसे बड़ी सफलता रही। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि अस्पताल, बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों पर अनजान लोगों पर तुरंत भरोसा न करें तथा बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतें।

जागरूकता ही सुरक्षा की पहली कवच

जशपुर का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सार्वजनिक स्थानों पर सतर्कता कितनी जरूरी है। एक मासूम की जान उसकी माँ से छीनी गई, लेकिन पुलिस की त्वरित और सटीक कार्रवाई ने उसे वापस ला दिया। लेकिन क्या हर बार ऐसा होगा? यही वह सवाल है जो हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर करता है। इस घटना से सीख लेते हुए हम सभी को चाहिए कि हम अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर कभी भी लापरवाही न बरतें। क्योंकि एक पल की लापरवाही, जीवन भर के दर्द से कम नहीं होती।

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