न्हावा शेवा पोर्ट पर मक्के की खेप में छिपाई गई 56 किलो मेथामफेटामाइन बरामद करते DRI अधिकारी

मक्के की बोरियों में छिपाकर भेजी जा रही थी 56 किलो मेथामफेटामाइन, DRI ने न्हावा शेवा पोर्ट पर पकड़ी खेप; दो गिरफ्तार

भारत से सऊदी अरब भेजी जा रही थी ड्रग्स की बड़ी खेप, 351 बोरियों के बीच मक्के में मिलाकर छिपाया गया था नशीला पदार्थ

मुंबई। भारत से सऊदी अरब भेजी जा रही नशीले पदार्थ की एक बड़ी खेप को राजस्व खुफिया निदेशालय यानी DRI ने पकड़ लिया है। अधिकारियों ने न्हावा शेवा पोर्ट पर एक निर्यात खेप की जांच के दौरान करीब 56 किलो मेथामफेटामाइन बरामद की है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ड्रग्स को किसी अलग पैकेट या कंटेनर में नहीं रखा गया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, नशीले पदार्थ को मक्के के साथ मिलाकर छिपाया गया था, ताकि सामान्य जांच के दौरान उस पर शक न हो।

DRI ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें निर्यातक और माल के परिवहन से जुड़े एक व्यक्ति की भूमिका की जांच की गई। यह कार्रवाई 16 और 17 अगस्त को खुफिया सूचना के आधार पर की गई थी।

351 बोरियों वाली खेप में छिपाई गई थी ड्रग्स

PIB की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह खेप निर्यात के लिए भेजी जा रही थी। कुल 351 बोरियां थीं, जिनमें से एक हिस्से में मक्के के साथ पाउडर के रूप में मेथामफेटामाइन मिलाई गई थी।

यानी बाहर से देखने पर खेप सामान्य कृषि उत्पाद जैसी दिखाई दे रही थी। इसी वजह से तस्करों ने मक्के को ड्रग्स छिपाने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया।

DRI के अनुसार, यह तरीका नियमित जांच और पहचान से बचने के इरादे से अपनाया गया था। एजेंसी ने बरामद करीब 56 किलो मेथामफेटामाइन को NDPS Act, 1985 के तहत जब्त कर लिया है।

सऊदी अरब भेजी जा रही थी खेप

जांच में सामने आया कि यह नशीला पदार्थ भारत से सऊदी अरब भेजने की कोशिश की जा रही थी। DRI की जांच आगे बढ़ने पर निर्यातक और ट्रांसपोर्टर/फ्रेट फॉरवर्डर की पहचान की गई।

एजेंसी के मुताबिक, माल की ढुलाई से जुड़ा व्यक्ति विदेश में मौजूद खरीदार के साथ संपर्क में था। वह खेप के ट्रांसपोर्टेशन और कस्टम्स क्लीयरेंस को लेकर समन्वय कर रहा था।

जांच में दोनों लोगों की कथित भूमिका सामने आने के बाद उन्हें NDPS Act के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है और एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

DRI के सामने थी अलग तरह की चुनौती

ड्रग्स तस्करी के मामलों में नशीले पदार्थों को छिपाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जाते रहे हैं। लेकिन इस मामले में बड़ी मात्रा में मेथामफेटामाइन को मक्के के साथ मिलाकर छिपाने का तरीका जांच एजेंसी के लिए भी अलग था।

DRI के अनुसार, खेप को सामान्य कृषि उत्पाद के रूप में पेश करने की कोशिश की गई थी। इसका मकसद यह था कि निर्यात के दौरान होने वाली सामान्य जांच में ड्रग्स की पहचान न हो सके।

हालांकि, खुफिया सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई ने तस्करों की योजना को नाकाम कर दिया।

मेथामफेटामाइन क्या है?

मेथामफेटामाइन एक शक्तिशाली सिंथेटिक साइकोस्टिमुलेंट ड्रग है, जिसके दुरुपयोग और निर्भरता की आशंका अधिक होती है। इसका अवैध इस्तेमाल शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है।

PIB के अनुसार, इसके सेवन से हृदय गति और रक्तचाप बढ़ने, बेचैनी, भ्रम, पैरानॉइया और मानसिक अस्थिरता जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक या बार-बार इस्तेमाल से नशे की लत और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने का खतरा रहता है।

दो लोगों की गिरफ्तारी, नेटवर्क की जांच जारी

इस मामले में अब जांच का फोकस सिर्फ बरामद ड्रग्स तक सीमित नहीं रहेगा। DRI यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि 56 किलो मेथामफेटामाइन कहां से लाई गई, इसे किसने तैयार या उपलब्ध कराया और सऊदी अरब में इसका अंतिम खरीदार कौन था।

निर्यातक और फ्रेट फॉरवर्डर की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी उनके संपर्कों, दस्तावेजों और इस खेप से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर सकती है।

इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स की बरामदगी से यह भी संकेत मिलता है कि मामला किसी संगठित तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

DRI की कार्रवाई से नाकाम हुई तस्करी की कोशिश

न्हावा शेवा पोर्ट पर पकड़ी गई यह खेप इसलिए भी अहम है क्योंकि ड्रग्स को सामान्य कृषि उत्पाद की आड़ में विदेश भेजने की कोशिश की गई थी।

मक्के की बोरियों में छिपाकर करीब 56 किलो मेथामफेटामाइन सऊदी अरब भेजने की योजना बनाई गई थी, लेकिन DRI की खुफिया कार्रवाई ने इस प्रयास को नाकाम कर दिया।

फिलहाल दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस ड्रग्स नेटवर्क और इसके विदेशी संपर्कों को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है।

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