कोलकाता: पार्क सर्कस में बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा, कई पुलिसकर्मी घायल

 

कोलकाता | 17 मई 2026

कोलकाता के पार्क सर्कस 7-पॉइंट क्रॉसिंग इलाके में रविवार को हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। तिलजला में बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में इकट्ठा हुई भीड़ और पुलिस के बीच झड़प हो गई, जिसमें पथराव की घटनाओं के बाद कई पुलिसकर्मी घायल हो गए


प्रदर्शन का कारण और हिंसा की पूरी कहानी

दरअसल, इससे पहले सप्ताह में तिलजला इलाके में प्रशासन ने अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया था। यह कार्रवाई एक फैक्ट्री में लगी आग के बाद की गई थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी । इसी कार्रवाई के खिलाफ रविवार दोपहर भारी संख्या में लोग पार्क सर्कस के 7-पॉइंट चौराहे पर इकट्ठा हो गए और सड़कों पर जाम लगाने की कोशिश की

जब पुलिस ने इस “अवैध जमावड़े” को तितर-बितर करने की कोशिश की, तभी अचानक प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया । जानकारी के अनुसार, इस हमले में एक सीआरपीएफ की बस समेत कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया

हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस झड़प का कारण बुलडोजर कार्रवाई को बताया जा रहा है, वहीं कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके पीछे सार्वजनिक रूप से नमाज पढ़ने पर लगाए गए प्रतिबंध और लाउडस्पीकर से जुड़े नए नियम भी एक बड़ी वजह हैं । प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बीजेपी की नई सरकार आने के बाद अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है

पुलिस की कार्रवाई और फिलहाल के हालात

कोलकाता पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त आशेष बिस्वास ने मीडिया को बताया कि पुलिस ने स्थिति को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज किया। उन्होंने पुष्टि की कि इस दौरान तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और कई वाहनों को नुकसान पहुंचा है । उन्होंने कहा:

“कुछ लोगों ने सड़क जाम करने की कोशिश की। पुलिस उन्हें हटा रही थी तभी उन्होंने पथराव शुरू कर दिया। हमने कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और बाकियों की पहचान कर रहे हैं। इसमें शामिल हर किसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी”

घटना के बाद पार्क सर्कस और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में कोलकाता पुलिस और केंद्रीय बलों को तैनात कर दिया गया है । फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, और पुलिस क्षेत्र में फ्लैग मार्च कर रही है

सरकारी आदेशों और परंपरा के बीच तनाव

यह घटना शुक्रवार को राजाबाजार इलाके में हुए तनाव के तुरंत बाद आई है, जहां लोगों ने सड़कों पर नमाज पढ़ने की कोशिश की थी, जिसे सरकार के नए दिशानिर्देशों के तहत प्रतिबंधित माना जा रहा है । सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ निर्देश दे दिए हैं कि नमाज केवल मस्जिदों या ईदगाहों में ही पढ़ी जाए, सड़कों पर नहीं

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़कों पर नमाज पढ़ने की परंपरा कई दशकों पुरानी है और इसे अचानक बंद करना उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है

यह मामला अब कोलकाता में कानून-व्यवस्था और नई सरकार के नीतिगत फैसलों की एक बड़ी परीक्षा बन गया है। फिलहाल, प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है

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