गौतम अडानी को बड़ी राहत: अमेरिकी अदालत ने क्रिमिनल केस किया खारिज, सभी आरोप समाप्त

 

Photo; Google Images Creative Commons


नई दिल्ली/वॉशिंगटन | 20 मई 2026

भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और अडानी ग्रुप को अमेरिका से बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) ने उनके खिलाफ लगे करोड़ों डॉलर के कथित रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोपों को वापस ले लिया है और केस को पूरी तरह से खारिज कर दिया है.

अमेरिकी अदालत ने क्या फैसला दिया?

दरअसल, न्यूयॉर्क की एक अदालत में गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और अडानी ग्रीन एनर्जी के एक और अधिकारी विनीत जैन पर वायर फ्रॉड और सिक्योरिटी फ्रॉड (शेयर बाजार धोखाधड़ी) का केस चल रहा था.

17 मई 2026 को अमेरिकी अभियोजकों ने कोर्ट से इन चार्जेस को “विद प्रीज्यूडिस” यानी हमेशा के लिए और बिना शर्त खारिज करने की मांग की. अदालत ने इस मांग को मंजूर कर लिया और यह आदेश दे दिया कि इन आरोपों पर दोबारा केस नहीं चलाया जा सकता.

इसी के साथ गौतम अडानी पर लगे सारे क्रिमिनल आरोप खत्म हो गए हैं.

आखिर यह केस था क्या और क्यों आया?

यह केस साल 2024 के अंत में अमेरिकी न्याय विभाग ने दर्ज किया था. आरोप था कि अडानी समूह ने भारत में सबसे बड़ी सोलर एनर्जी परियोजना के लिए 265 मिलियन डॉलर (लगभग 2200 करोड़ रुपये) से अधिक का रिश्वतखोरी का नेटवर्क चलाया और इस बारे में अमेरिकी निवेशकों से झूठ बोला.

अडानी ग्रुप ने शुरू से ही इन आरोपों को “निराधार” करार दिया था.

CBI जांच के बाद केस कैसे खत्म हुआ? (अमेरिकी न्याय विभाग की वजह)

अदालत में दाखिल याचिका में अमेरिकी अभियोजकों ने साफ लिखा, “अमेरिकी न्याय विभाग ने इस मामले की समीक्षा की है और अपने अभियोजन विवेकाधिकार (प्रॉसिक्यूटोरियल डिस्क्रेशन) में निर्णय लिया है कि वह व्यक्तिगत आरोपियों के खिलाफ इन क्रिमिनल चार्जेस पर और संसाधन खर्च नहीं करेगा”.

अमेरिकी अदालत ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया और केस को खारिज करने का आदेश दे दिया.

CBI (यूएस सेटलमेंट) और आगे की कार्रवाई

हालांकि यह क्रिमिनल केस बंद हो गया है, लेकिन अडानी समूह को सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के एक सिविल केस में बिना गलती माने (Without admitting or denying wrongdoing) अदालत द्वारा मंजूर किए गए जुर्माने के तहत भुगतान करना पड़ा.

गौतम अडानी पर 6 मिलियन डॉलर (लगभग 50 करोड़ रुपये) और सागर अडानी पर 12 मिलियन डॉलर (लगभग 100 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया गया था, जो उन्होंने चुका दिया.

साथ ही, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (ओएफएसी) की एक अलग जांच में अडानी ग्रुप पर 275 मिलियन डॉलर (लगभग 2300 करोड़ रुपये) का जुर्माना भी लगा था.

सेटलमेंट के पीछे क्या वजह रही?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी अभियोजकों को इन आरोपों को साबित करने में कठिनाई हो रही थी। अडानी की कानूनी टीम ने तर्क दिया था कि अमेरिकी अदालतों का इस मामले पर कोई अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) नहीं है क्योंकि कथित गतिविधियां भारत में हुई थीं, अमेरिका में नहीं.

यह भी कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में अमेरिकी न्याय विभाग पिछली सरकार के समय शुरू किए गए कई ‘फॉरेन ब्रिबरी’ (विदेशी रिश्वतखोरी) के मामलों को बंद कर रहा है.

अडानी ग्रुप पर क्या असर पड़ेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से अडानी ग्रुप पर से कानूनी बादल हट गए हैं.

  • निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा: अब कंपनी के पास कोई लंबित क्रिमिनल केस नहीं है, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा वापस आएगा.

  • वैश्विक विस्तार पर फोकस: यह फैसला अडानी ग्रुप के लिए अमेरिका और दूसरे देशों में नए प्रोजेक्ट्स और निवेश का रास्ता साफ करता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *