छत्तीसगढ़ में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के बाद अब खुद होगा नामांतरण, नहीं भटकना पड़ेगा तहसील-पटवारी कार्यालय

 


रायपुर। अब छत्तीसगढ़ में जमीन या मकान की रजिस्ट्री कराने के बाद लोगों को नामांतरण (म्यूटेशन) के लिए अलग से तहसील और पटवारी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा फैसला लेते हुए यह व्यवस्था लागू कर दी है कि रजिस्ट्री पूरी होते ही नामांतरण की प्रक्रिया अपने आप (ऑटोमैटिक) शुरू हो जाएगी।

यानी अब न तो अलग से आवेदन देना होगा, न दस्तावेज जमा करने के लिए लाइनों में लगना पड़ेगा, और न ही अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। यह सुविधा डिजिटल सिस्टम पर आधारित होगी, जो रजिस्ट्री के तुरंत बाद सीधे राजस्व विभाग के रिकॉर्ड को अपडेट कर देगी।

अब तक क्या होता था? महीनों की टेंशन

पहले जब कोई व्यक्ति कोई जमीन या मकान खरीदता था और उसकी रजिस्ट्री कराता था, तो काम वहीं खत्म नहीं होता था। असली परेशानी शुरू होती थी नामांतरण की। नए मालिक का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए उसे पटवारी कार्यालय, तहसील, और कभी-कभी कई दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे।

कई बार तो फाइलें महीनों तक अटकी रहती थीं, ऊपर से बिना म्यूटेशन के लोन लेने, बिजली-पानी कनेक्शन लेने या फिर आगे बेचने में भी दिक्कत होती थी। यही नहीं, कई जगह तो नामांतरण के नाम पर अलग से अवैध वसूली की शिकायतें भी आती रही हैं। अब सरकार ने इस लंबी उलझन को खत्म करने का बीड़ा उठाया है।

अब क्या होगा? रजिस्ट्री के साथ ही काम खत्म

नई व्यवस्था के तहत, जैसे ही कोई प्रॉपर्टी रजिस्ट्री होगी, रजिस्ट्रेशन विभाग उसकी जानकारी ऑनलाइन माध्यम से राजस्व विभाग को भेज देगा। राजस्व विभाग का आईटी सिस्टम उसी समय नामांतरण की कार्रवाई शुरू कर देगा और रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम अपडेट कर देगा।

इस पूरी प्रक्रिया के लिए न तो किसी पटवारी से मिलना होगा, न ही आवेदन की फाइल दौड़ानी होगी। बस छत्तीसगढ़ सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म से यह काम चंद मिनटों में हो जाएगा। इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि रिकॉर्ड में हेराफेरी या फर्जीवाड़े की आशंका भी कम हो जाएगी।

किसको क्या फायदा – आम आदमी से लेकर किसान तक

इस फैसले का सीधा लाभ उन सभी लोगों को मिलेगा जो जमीन-मकान खरीदते या बेचते हैं। खासतौर पर मध्यम वर्ग के लोग, जो अपनी पूरी जिंदगी की कमाई एक प्रॉपर्टी में लगाते हैं, उन्हें अब नामांतरण की परेशानी से राहत मिलेगी।

वहीं, ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले किसानों के लिए यह राहत और भी बड़ी है। अक्सर ऐसा होता था कि एक गांव से दूसरे गांव के पटवारी कार्यालय जाने में पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। अब ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं रहेगी।

महिलाओं और सैनिकों को पहले ही मिली छूट, अब नई राहत

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार पिछले कुछ समय से प्रॉपर्टी रजिस्ट्री को लेकर एक के बाद एक राहत भरे फैसले ले रही है। कुछ दिनों पहले ही महिलाओं के नाम रजिस्ट्री पर पंजीयन शुल्क में 50 फीसदी छूट लागू की गई थी, जिससे एक करोड़ की प्रॉपर्टी पर तीन लाख रुपए से अधिक की बचत हो रही है। इसके अलावा सैनिकों और पूर्व सैनिकों को भी विशेष छूट दी गई है। अब ऑटो म्यूटेशन सेवा को जोड़ने से ये सारे काम और भी आसान हो गए हैं।

रियल एस्टेट बाजार में नई उमंग

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की सुविधा से रियल एस्टेट बाजार में तेजी आ सकती है। जब लोगों को पता चलेगा कि रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की कोई अलग परेशानी नहीं है, तो लोग अधिक भरोसे के साथ प्रॉपर्टी खरीदेंगे। खासतौर पर रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और कोरबा जैसे शहरों में प्रॉपर्टी कारोबार को गति मिलने की संभावना है।

डिजिलॉकर और आधार से होगी जोड़ी

सरकार की कोशिश है कि यह पूरी प्रक्रिया कागजरहित और कैशलेस हो। इसके लिए आधार आधारित सत्यापन, डिजिलॉकर इंटीग्रेशन, और ऑनलाइन भुगतान जैसी सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। इससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर तो कम लगेंगे ही, साथ ही रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका भी खत्म होगी।

क्या रुकेगा भ्रष्टाचार?

यह सवाल इस व्यवस्था को लेकर सबसे अहम है। जब प्रक्रिया पूरी तरह से ऑटोमैटिक और डिजिटल होगी, तो बीच में कोई दूसरा व्यक्ति दखल नहीं दे पाएगा। पहले कई बार देखा गया कि नामांतरण के नाम पर पटवारी या तहसील स्तर पर अवैध प्रताड़ना या रिश्वतखोरी की शिकायतें सामने आती थीं। इस नई व्यवस्था में मशीन काम करेगी, आदमी नहीं – इसलिए भ्रष्टाचार की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी।

पड़ताल की सुविधा भी डिजिटल ही

नामांतरण होने के बाद भी लोग चाहें तो ऑनलाइन यह देख सकेंगे कि उनका रिकॉर्ड अपडेट हुआ या नहीं। नए मालिक को एक पावती भी डिजिटल माध्यम से मिल जाएगी। अगर किसी वजह से सिस्टम में कोई रुकावट आती है, तो लोग ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे।

तो क्या अब सब कुछ आसान हो गया?

जी हां। सरकारी दावा है कि यह फैसला पूरी तरह ई-गवर्नेंस मॉडल पर आधारित है, जिससे लोगों को पारदर्शी और त्वरित सेवा मिलेगी। आने वाले महीनों में पूरे सिस्टम को सभी जिलों और तहसीलों से जोड़ दिया जाएगा। हां, शुरुआत में तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि सभी स्तरों पर स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

नए जमाने की नई व्यवस्था

मोटे तौर पर यह समझिए कि अब प्रॉपर्टी खरीदने के बाद सबसे लंबा काम जो था – वह खत्म। रजिस्ट्री होते ही नामांतरण भी हो जाएगा। यानी बची हुई सारी औपचारिकताएं अपने आप पूरी हो जाएंगी। सरकार इस कदम को ‘ईज ऑफ लिविंग’ की दिशा में बड़ी पहल मान रही है।

अब देखना यह है कि यह ऑटो-म्यूटेशन की व्यवस्था जमीन पर कितनी कारगर साबित होती है, लेकिन जितना इसकी घोषणा से लग रहा है, उतना तो यकीनन छत्तीसगढ़ के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।


छत्तीसगढ़ में महिलाओं के नाम रजिस्ट्री पर 50% छूट, सैनिकों को भी राहत – एक करोड़ की प्रॉपर्टी पर बचेंगे 3.12 लाख रुपए

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