छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर पर बढ़ा सियासी संग्राम: कांग्रेस आंदोलन की तैयारी में, बैज बोले- घरों से हटाए जाएं मीटर

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छत्तीसगढ़ में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर अब सियासी तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक तरफ सरकार इसे डिजिटल बदलाव और बिजली चोरी रोकने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष और आम उपभोक्ता बढ़ते बिजली बिलों को लेकर भड़के हुए हैं। प्रदेश कांग्रेस ने अब इसे लेकर बड़ा आंदोलन शुरू करने की तैयारी कर ली है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने साफ शब्दों में कहा है कि ये स्मार्ट मीटर लोगों का जीना मुहाल कर रहे हैं और इन्हें तुरंत घरों से हटाया जाए।

क्या है पूरा मामला? क्यों भड़के हैं लोग?

पिछले कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ के कई जिलों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। लेकिन जैसे ही ये मीटर एक्टिव हुए, लोगों के बिजली बिलों में अचानक जबरदस्त उछाल देखने को मिला। वही परिवार, जो पहले 800-1000 रुपये का बिल भरता था, अब 2500-3000 रुपये तक चुकाने को मजबूर है। कांग्रेस नेता दीपक बैज ने रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि यह कोई तकनीकी खामी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश है जिससे निजी कंपनियों को फायदा पहुंच रहा है और आम आदमी की जेब कट रही है।

बैज ने कहा – “पहले जिन घरों में कम बिजली बिल आता था, अब उन पर महंगाई की दोहरी मार पड़ रही है। सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करके स्मार्ट मीटर योजना पर रोक लगानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो कांग्रेस जिला-जिला में विरोध प्रदर्शन करेगी और आंदोलन को राज्यव्यापी रूप देगी।”

उपभोक्ताओं का दर्द – अब सहन नहीं हो रहा बोझ

रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव समेत कई शहरों में उपभोक्ता बिजली बिलों को लेकर परेशान हैं। एक निवासी ने बताया – “हमारे घर में पहले 1200 रुपये का बिल आता था। स्मार्ट मीटर लगने के बाद पहले ही महीने बिल 3200 रुपये आ गया। हमने बिजली विभाग से संपर्क किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”

एक अन्य ग्राहक ने आरोप लगाया – “मीटर रीडिंग इतनी तेजी से बढ़ रही है जैसे घर में दो इंडस्ट्री लगी हुई हों। मैं तो घर में बल्ब भी कम जलाता हूं, फिर भी बिल तिगुना आ गया।”

सोशल मीडिया पर भी लोग बढ़े हुए बिलों की फोटो और स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे हैं। हैशटैग #SmartMeterScam और #BijliLoot तेजी से वायरल हो रहे हैं। कई उपभोक्ता संगठन भी इसे लेकर सक्रिय हो गए हैं।

सरकार और बिजली विभाग का क्या कहना है?

हालांकि दूसरी तरफ, बिजली विभाग और राज्य सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह डिजिटल और सटीक तकनीक पर काम करते हैं। यह रीयल टाइम में बिजली खपत का डेटा रिकॉर्ड करते हैं। पुराने मीटरों में अक्सर तकनीकी खराबी या खराब कैलिब्रेशन के कारण सही रीडिंग नहीं आती थी, जबकि अब ग्राहकों को वास्तविक खपत का बिल दिया जा रहा है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया – “जिन उपभोक्ताओं के बिल बढ़े हैं, उनमें से अधिकांश पहले कम बिल दे रहे थे क्योंकि उनके पुराने मीटर धीमे चल रहे थे। स्मार्ट मीटर से पारदर्शिता आई है, और बिजली चोरी पर भी लगाम लगेगी।”

केंद्र सरकार की इस योजना के तहत देशभर में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इससे बिजली व्यवस्था में सुधार, नुकसान कम करने और उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग की सुविधा देने का दावा किया जा रहा है।

दीपक बैज का नया हमला – “घरों से हटाए जाएं मीटर”

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इस मुद्दे को अब जोरशोर से उठाना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक अन्याय है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सभी स्मार्ट मीटर तुरंत हटाए जाएं और पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे और घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे।

बैज ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह निजी कंपनियों के दबाव में इस योजना को लागू कर रही है और आम जनता के हितों की बलि चढ़ा रही है। उन्होंने कहा – “जब तक अंतिम ग्राहक को राहत नहीं मिलती, हम चुप नहीं बैठेंगे।”

अन्य राज्यों में भी उठे सवाल

छत्तीसगढ़ अकेला राज्य नहीं है जहां स्मार्ट मीटर विवादित हुआ है। बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश में भी इसी तरह के मामले सामने आ चुके हैं। कई जगहों पर उपभोक्ताओं ने बढ़े हुए बिल को लेकर अदालतों का दरवाजा भी खटखटाया है। हालांकि बिजली कंपनियों का तर्क हर जगह एक जैसा है – पुराने मीटर सही काम नहीं कर रहे थे, अब सटीक रीडिंग आ रही है।

लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जहां एक तरफ स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से अच्छी पहल है, वहीं इसे लागू करने से पहले उपभोक्ताओं को पर्याप्त जागरूकता और शिकायत निवारण प्रणाली देना बेहद जरूरी है। बिना समझाए लागू की गई कोई भी नई तकनीक अविश्वास पैदा करती है।

आगे क्या होगा? जनता क्या कहेगी?

फिलहाल, सरकार और विपक्ष के बीच यह मुद्दा गरमाया हुआ है। कांग्रेस इसे चुनावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी में है, जबकि सरकार इसे विकास और सुधार का हिस्सा बता रही है। बीच में फंसी आम जनता है, जो सीधे तौर पर बढ़े हुए बिल का बोझ झेल रही है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार उपभोक्ताओं की शिकायतों पर गंभीरता से काम करती है, या फिर यह मामला सड़कों पर उतरता है। एक बात तो तय है – स्मार्ट मीटर अब सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं रहा है, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति का एक ज्वलंत मुद्दा बन चुका है। और आने वाले दिनों में इस पर न सिर्फ सड़कें गर्म होंगी, बल्कि विधानसभा में भी जमकर हंगामा होने की संभावना है।

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