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राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) | 2 जून 2026
शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव करते हुए एक गंभीर मामले में ज्ञापन सौंपा और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। यह विरोध सोमनी थाना क्षेत्र में घटित एक घटना को लेकर किया गया, जिसमें एक किशोरी और उसके परिजनों के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार का आरोप लगाया गया है।
पूरा मामला क्या है?
यह पूरा प्रकरण 25 मई 2026 को तब शुरू हुआ, जब 14 वर्षीय किशोरी को पेट में तेज दर्द के कारण सोमनी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया .
जांच के दौरान, लैब टेक्नीशियन ने बेहद लापरवाही से प्रेग्नेंसी टेस्ट किया और प्रारंभिक रिपोर्ट में उसे गलत तरीके से गर्भवती बता दिया .
इस रिपोर्ट के आधार पर, स्वास्थ्य विभाग ने POCSO एक्ट के तहत मामला बनते देख पुलिस को सूचना दे दी .
इसके बाद, पुलिस किशोरी को थाने ले आई और कथित तौर पर उसे रात भर वहीं रोके रखा। आरोप है कि जांच के दौरान लड़की और उसके परिजनों को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा .
हालांकि, अगले दिन राजनांदगांव में कराए गए अल्ट्रासाउंड और दोबारा मेडिकल टेस्ट में यह साफ हो गया कि प्रारंभिक रिपोर्ट पूरी तरह गलत थी . कुल चार अलग-अलग टेस्ट किए गए, जिनमें सभी के परिणाम नेगेटिव आए .
🏛️ कांग्रेस की क्या मांगें हैं?
जिला कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र उदय मुदलियार के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में प्रशासन से कई महत्वपूर्ण मांगें की गई हैं :
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पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
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दोषी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए
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किशोरी के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की स्वतंत्र जांच हो
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POCSO एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम के तहत उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
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गर्भ जांच किट की गुणवत्ता एवं खरीद प्रक्रिया की भी जांच हो
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दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो
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भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जवाबदेही तय की जाए
प्रशासन ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की है। उन्होंने सोमनी थाना प्रभारी अरुण नामदेव, महिला कांस्टेबल राजश्री सिंह, साथ ही लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों और लैब टेक्नीशियन को निलंबित कर दिया है .
एसपी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर आश्वासन दिया है कि न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। किशोरी के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था भी की गई है . साथ ही, इस मामले में विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं .
क्यों गरम हुआ मामला?
कांग्रेस का कहना है कि यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही और मानवाधिकारों से जुड़ा मामला है। यह घटना बता है कि कैसे एक छोटी-सी मेडिकल लापरवाही ने 14 साल की एक मासूम बच्ची के साथ कैसा व्यवहार करवा दिया .
निष्कर्ष
राजनांदगांव में यह विरोध प्रदर्शन पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। कांग्रेस ने साफ किया है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में आगे क्या कदम उठाता है।

