राजनांदगांव में कांग्रेस का SP ऑफिस घेराव: किशोरी के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में सख्त कार्रवाई की मांग

Photo: FB/Vikalp Shrivastav


राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) | 2 जून 2026

राजनांदगांव जिला कांग्रेस कमेटी ने सोमनी थाना क्षेत्र में घटित एक गंभीर मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने एक किशोरी और उसके परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा प्रकरण 25 मई को तब शुरू हुआ, जब 14 वर्षीय किशोरी को पेट में तेज दर्द के कारण सोमनी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया . आरोप है कि डॉक्टरों और लैब टेक्नीशियनों ने बेहद लापरवाही से उसकी जांच की और प्रारंभिक रिपोर्ट में उसे गलत तरीके से गर्भवती बता दिया .

इस रिपोर्ट के आधार पर, स्वास्थ्य विभाग ने POCSO एक्ट के तहत मामला बनते देख पुलिस को सूचना दे दी। इसके बाद, पुलिस किशोरी को थाने ले आई और कथित तौर पर उसे रातभर वहीं रोके रखा . परिवार के अनुसार, जांच के दौरान लड़की और उसके परिजनों को मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा.

हालांकि, अगले दिन राजनांदगांव में कराए गए अल्ट्रासाउंड और दोबारा मेडिकल टेस्ट में यह साफ हो गया कि प्रारंभिक रिपोर्ट पूरी तरह गलत थी . इस मामले ने जैसे ही सार्वजनिक रूप लिया, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया.

क्या कार्रवाई हुई?

प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की। जिला एसपी अंकिता शर्मा ने सोमनी थाना प्रभारी अरुण नामदेव और महिला कांस्टेबल राजश्री सिंह को निलंबित कर दिया . साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने भी लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों और लैब टेक्नीशियन के खिलाफ कार्रवाई की है. एसपी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर आश्वासन दिया है कि न्याय सुनिश्चित किया जाएगा और किशोरी के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था की गई है .

प्रदर्शनकारियों की मांगें

हालांकि, प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई के बावजूद, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का आक्रोश कम नहीं हुआ। उनका कहना है कि:

  • दोषी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए

  • मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो, ताकि दोषियों को सजा मिल सके।

  • साथ ही, स्वास्थ्य विभाग में कथित फर्जी किट खरीदी के मामले में भी संबंधित अधिकारियों और सप्लायरों पर एफआईआर दर्ज की जाए.

कांग्रेस का कहना है कि यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही और मानवाधिकारों से जुड़ा मामला है . प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

निष्कर्ष

राजनांदगांव में यह विरोध प्रदर्शन पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि एक छोटी सी लापरवाही किस तरह से एक किशोरी और उसके परिवार के लिए मानसिक आघात का कारण बन सकती है. अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और कितना गर्म होता है और प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।

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