राजनांदगाव : खाद-बीज संकट को लेकर किसानों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, 10 सूत्रीय मांगों की सूची

Photo: FB/ Vikalp Shrivastav

राजनांदगाव | 5 जून 2026

जिले में खाद और बीज के गंभीर संकट को लेकर किसानों ने एक बार फिर सड़क का रुख किया है। जिला किसान कांग्रेस के बैनर तले किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने 10 सूत्रीय मांगें रखते हुए प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की।

किसानों की समस्या क्या है?

राजनांदगाव जिले में इस समय खाद (यूरिया, डीएपी) और बीज की भारी किल्लत है। किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों (सोसाइटी) के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं, फिर भी कई किसानों को पूरी खाद नहीं मिल पाती। इसका सीधा असर बुवाई पर पड़ रहा है और किसान चिंतित हैं।

किसान नेताओं ने क्या कहा?

किसान कांग्रेस के पदाधिकारियों ने सरकार की ‘प्रति एकड़ एक बोरी खाद’ की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह फॉर्मूला पूरी तरह गलत है। एक बोरी खाद से किसानों की जरूरतें पूरी नहीं होतीं।

वहीं, तीन किस्तों में खाद बांटने की व्यवस्था को लेकर भी किसानों में रोष है। किसानों का कहना है कि छोटे किसान के लिए बार-बार सोसाइटी जाना संभव नहीं है। इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। उनकी मांग है कि खाद का एकमुश्त (एक साथ) वितरण किया जाए।

किसानों की 10 सूत्रीय मांगें:

ज्ञापन में किसानों ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  1. प्रति एकड़ एक बोरी खाद की बाध्यता को तुरंत समाप्त किया जाए।

  2. खाद का एकमुश्त वितरण सुनिश्चित किया जाए (तीन किस्तों वाली व्यवस्था खत्म हो)।

  3. टोकन सिस्टम को समाप्त किया जाए, ताकि किसानों को बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें।

  4. डीजल और पेट्रोल की सुगम आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

  5. कृषि के लिए बिजली सस्ती और नियमित उपलब्ध कराई जाए।

  6. खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

  7. पूरे प्रदेश में खाद की एक समान दर लागू की जाए।

  8. किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की ऋण सीमा 40,000 रुपये प्रति एकड़ की जाए।

  9. धान की राशि का एकमुश्त भुगतान किया जाए।

  10. गैस सिलेंडर के दामों में कमी लाई जाए।

प्रशासन को दी चेतावनी

किसानों ने साफ कर दिया है कि अगर इन मांगों पर जल्द कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और तेज कर देंगे। उनका कहना है कि “किसानों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जल्द समाधान नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।”

फिलहाल, किसान प्रशासन के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। सबकी नजर इस बात पर है कि सरकारी तंत्र किसानों की इन समस्याओं का कितनी गंभीरता से समाधान निकालता है। अगर समय रहते समाधान नहीं मिला, तो राजनांदगाव अगले हफ्ते एक बार फिर किसान आंदोलन की भेंट चढ़ सकता है।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *