रायपुर मरीन ड्राइव पर बड़ा एक्शन: 15 दिनों में हटेगी जलकुंभी, देवार डेरा हटाने के निर्देश

 


रायपुर के सबसे पसंदीदा सार्वजनिक स्थलों में से एक मरीन ड्राइव। ठंडी हवा, लहराता पानी, हरियाली और सुबह-शाम टहलते लोग – यहाँ का नज़ारा किसी पर्वतीय झील से कम नहीं लगता। लेकिन पिछले कुछ समय से इस खूबसूरती पर ग्रहण लग गया था। तेजी से फैलती जलकुंभी ने न केवल पानी की सतह को ढक लिया था, बल्कि आसपास बदबू और गंदगी ने लोगों का आना-जाना मुश्किल कर दिया था। अब प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए एक्शन मोड में आ गया है।

पुरंदर मिश्रा ने किया निरीक्षण, अफसरों को लगाई फटकार

शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं। सोशल मीडिया पर मरीन ड्राइव की दुर्दशा की तस्वीरें वायरल हो रही थीं। इसी के बाद रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने मौके पर पहुँचकर स्वयं हालात का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान वे जलकुंभी की स्थिति देखकर हैरान रह गए। उन्होंने मौजूद अधिकारियों से सख्ती से कहा कि अब देरी और नहीं चलेगी। उन्होंने साफ निर्देश दिए कि 15 दिनों के भीतर पूरे क्षेत्र से जलकुंभी को पूरी तरह हटाया जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उनका कहना था – “मरीन ड्राइव केवल एक जगह नहीं है, यह रायपुरवासियों की पहचान है। यहाँ सुबह बुजुर्ग टहलने आते हैं, शाम को परिवार घूमने निकलते हैं। गंदगी और जलकुंभी के कारण लोगों को परेशानी हो रही है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

देवार डेरा हटाने के भी निर्देश – मानवीय पहलू पर भी नजर

निरीक्षण के दौरान नगर निगम आयुक्त ने मरीन ड्राइव के आसपास बने देवार डेरों (अस्थायी आश्रयों) को हटाने के आदेश भी दिए। अधिकारियों का कहना है कि कई जगहों पर अस्थायी कब्जों और अव्यवस्थित गतिविधियों के कारण सफाई व्यवस्था बाधित हो रही थी। कचरा जमा हो रहा था, और सार्वजनिक स्थान अतिक्रमण का शिकार हो रहा था।

हालाँकि इस मुद्दे पर संवेदनशीलता बरतने की भी जरूरत है। देवार डेरा वहाँ रहने वाले गरीब और असहाय लोगों के लिए अस्थायी आश्रय स्थल है। प्रशासन ने कहा है कि कानून और व्यवस्था के तहत आवश्यक कदम उठाए जाएँगे, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जाएगा। स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि डेरा हटाने से पहले इन लोगों के पुनर्वास की कोई ठोस योजना होनी चाहिए, ताकि कोई सड़कों पर न रहे।

जलकुंभी क्यों है खतरनाक? पर्यावरण पर बुरा असर

पर्यावरण विशेषज्ञ बताते हैं कि जलकुंभी (वॉटर हायसिंथ) एक बेहद खतरनाक जलीय खरपतवार है। यह बहुत तेजी से फैलती है और पानी की सतह को पूरी तरह ढक लेती है। इसके कारण:

  • पानी के अंदर ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है

  • मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मौत होने लगती है

  • पानी सड़ने लगता है, जिससे बदबू फैलती है

  • मच्छरों और दूसरे कीटों का प्रजनन बढ़ जाता है

  • पानी की नेचुरल फ्लो और दृश्यता दोनों प्रभावित होती हैं

अगर समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो मरीन ड्राइव जैसी खूबसूरत झील गंदे तालाब में बदल सकती है। यही चिंता देखते हुए प्रशासन ने तत्काल अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है।

अभियान कैसे चलेगा? मशीनों और मैनपावर दोनों का इस्तेमाल

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार जलकुंभी हटाने के लिए विशेष मशीनें, नावें और सफाई कर्मचारियों की टीमें लगाई जाएंगी। पानी में उतरकर मैन्युअल तरीके से भी इसे निकाला जाएगा। बड़े इलाकों में मशीनों की मदद ली जाएगी तो छोटी-छोटी खाड़ियों में मजदूर नावों पर बैठकर जलकुंभी को बाहर निकालेंगे।

प्रशासन का दावा है कि 15 दिनों में पूरे मरीन ड्राइव क्षेत्र को न केवल जलकुंभी से मुक्त कर दिया जाएगा, बल्कि आसपास की सफाई और कचरा निस्तारण भी सुनिश्चित किया जाएगा। इसके बाद नियमित निगरानी की जाएगी ताकि यह समस्या दोबारा न उभरे।

लोगों का स्वागत, लेकिन आशंकाएं भी

प्रशासन के इस फैसले का स्थानीय लोगों ने स्वागत किया है। सुबह टहलने आने वाले बुजुर्ग, शाम को घूमने वाले परिवार – सब राहत की सांस ले रहे हैं। एक निवासी ने कहा – “पिछले दो-तीन महीने से यहाँ हालत बहुत खराब थी। जलकुंभी इतनी फैल गई थी कि पानी दिखाई भी नहीं देता था। बदबू से मन घबरा जाता था। अब उम्मीद है कि चीजें सुधरेंगी।”

वहीं कुछ लोगों को डर है कि कहीं यह अभियान ढीला न पड़ जाए। उनका कहना है कि प्रशासन को सिर्फ निर्देश जारी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सख्त निगरानी की भी जरूरत है। सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार मरीन ड्राइव को लेकर पोस्ट कर रहे हैं और प्रशासन से इस सुंदर स्थल को बचाने की मांग कर रहे हैं।

अब देखना यह है कि 15 दिनों में क्या होता है

पुरंदर मिश्रा का निरीक्षण और नगर निगम आयुक्त का सख्त रुख यह साबित करता है कि अब प्रशासन मरीन ड्राइव की साफ-सफाई को गंभीरता से ले रहा है। जलकुंभी हटेगी, देवार डेरों को लेकर भी कार्रवाई होगी, और क्षेत्र को व्यवस्थित रखने की कोशिश होगी।

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब 15 दिन बाद यह देखना होगा कि क्या सच में मरीन ड्राइव अपनी पुरानी सुंदरता वापस पा चुका है। और सबसे बड़ी बात – क्या इस सफाई को बनाए रखने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था भी होगी? क्योंकि जलकुंभी हटाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है इसे दोबारा फैलने से रोकना।

फिलहाल, रायपुरवासियों की नजर अब नगर निगम के अभियान पर टिक गई है। उम्मीद है कि 15 दिनों में मरीन ड्राइव एक बार फिर वही खूबसूरत नजारा देगा, जिसके लिए यह जाना जाता है। और देवार डेरों के मामले में एक संतुलित और मानवीय समाधान भी निकलेगा – जहाँ शहर की सुंदरता भी बनी रहे, और किसी की रोजी-रोटी भी न छिने।

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