रायपुर। छत्तीसगढ़ करेंट अफेयर्स 2026: छत्तीसगढ़ में साल 2026 अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन इस साल के अब तक के घटनाक्रमों को एक साथ देखा जाए तो राज्य की राजनीति और प्रशासन से ज्यादा एक चीज दिखाई देती है—विकास का बदलता हुआ एजेंडा। एक तरफ सरकार गांव, किसान, गरीब, महिलाओं और युवाओं से जुड़ी योजनाओं पर काम करने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, डेटा सेंटर और आधुनिक उद्योगों को लेकर बड़े लक्ष्य रखे जा रहे हैं।
यानी छत्तीसगढ़ अब सिर्फ कोयला, लौह अयस्क, बिजली और इस्पात की पहचान तक सीमित रहने की कोशिश नहीं कर रहा। कम से कम सरकारी नीतियों और इस साल सामने आए फैसलों से तो यही संकेत मिलता है।
हालांकि घोषणाएं अपनी जगह हैं और उनका जमीन पर उतरना अलग बात। इसलिए 2026 की बड़ी घटनाओं को केवल सरकारी उपलब्धियों की सूची की तरह देखने के बजाय यह समझना भी जरूरी है कि इन फैसलों से राज्य के आम लोगों, युवाओं, कारोबारियों और ग्रामीण इलाकों पर क्या असर पड़ सकता है।
साल की शुरुआत में पेश हुआ राज्य का बजट इस पूरी तस्वीर को समझने का पहला आधार देता है।
₹1.72 लाख करोड़ का बजट और सरकार की प्राथमिकताएं
24 फरवरी को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट विधानसभा में पेश किया। बजट का कुल आकार करीब ₹1.72 लाख करोड़ रखा गया। PRS के विश्लेषण के मुताबिक ऋण चुकौती को छोड़कर कुल व्यय ₹1,72,000 करोड़ अनुमानित है। राज्य के GSDP का अनुमान वर्तमान कीमतों पर करीब ₹7.10 लाख करोड़ लगाया गया है।
बजट का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ इसका आकार नहीं है। असली बात यह है कि सरकार पैसा किन क्षेत्रों में लगाने जा रही है।
युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद देने के लिए CG ACE योजना में ₹33 करोड़ का प्रावधान किया गया। इसके तहत अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को सहायता देने की व्यवस्था है। UPSC और CGPSC जैसी परीक्षाओं से लेकर NEET, JEE, CLAT, रेलवे, बैंकिंग और SSC तक के अभ्यर्थियों को इससे जोड़ने की कोशिश की गई है।
छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं की संख्या को देखते हुए यह फैसला अपने आप में छोटा नहीं है। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे शहरों का रुख करने वाले विद्यार्थियों की संख्या काफी है। ऐसे में अगर सरकारी सहायता वास्तव में जरूरतमंद छात्रों तक पहुंचती है तो परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव कुछ कम हो सकता है।
लेकिन इसका असर कितने युवाओं तक पहुंचता है, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी।
बेटियों के लिए रानी दुर्गावती योजना
इसी बजट में रानी दुर्गावती योजना की घोषणा भी हुई। सरकारी बजट दस्तावेज के अनुसार परिवार में बालिका के जन्म के बाद उसके 18 वर्ष की उम्र पूरी करने पर ₹1.50 लाख देने का प्रावधान किया गया है। योजना के लिए ₹15 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है।
छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहां बड़ी आबादी ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में रहती है, ऐसी योजना का सामाजिक असर केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रह सकता। हालांकि किसी भी ऐसी योजना की सफलता इस बात से तय होती है कि पात्र परिवारों को इसका लाभ कितनी आसानी और कितनी पारदर्शिता से मिलता है।
योजना की घोषणा हो जाना एक चरण है, लेकिन वास्तविक चुनौती लाभार्थियों की पहचान और समय पर भुगतान की होगी।
इस साल सबसे ज्यादा चर्चा AI की
अगर 2026 की छत्तीसगढ़ की खबरों में से किसी एक विषय ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है तो वह है Artificial Intelligence।
अगस्त में राज्य मंत्रिपरिषद ने पांच साल के लिए ₹500 करोड़ के छत्तीसगढ़ स्टेट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन को मंजूरी दी। सरकार का कहना है कि AI का इस्तेमाल शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और दूसरे क्षेत्रों में किया जाएगा।
सरकार की योजना के मुताबिक 100 AI Data Labs और पांच Centres of Excellence विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके अलावा 300 से ज्यादा AI startups को सहयोग देने और करीब 6 लाख विद्यार्थियों तथा 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को AI से जुड़े प्रशिक्षण देने की योजना बताई गई है।
यहीं से कहानी थोड़ी दिलचस्प हो जाती है।
आज AI की चर्चा दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद या मुंबई जैसे शहरों में आम हो चुकी है। लेकिन किसी राज्य सरकार का इसे अपने प्रशासन और विकास मॉडल का हिस्सा बनाना अलग बात है।
मान लीजिए किसी दूरदराज के इलाके में किसान को फसल से जुड़ी जानकारी चाहिए, किसी सरकारी अधिकारी को बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करना है या किसी अस्पताल में मरीजों के रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके बेहतर निर्णय लेने हैं। अगर AI आधारित सिस्टम सही तरीके से काम करते हैं तो ऐसे क्षेत्रों में तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।
लेकिन यहां एक बड़ी शर्त है—सिर्फ मशीनें खरीदने या AI Lab बनाने से बदलाव नहीं आएगा। लोगों को उसका इस्तेमाल करना भी आना चाहिए। यही वजह है कि 6 लाख विद्यार्थियों और डेढ़ लाख सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य इस पूरी योजना का अहम हिस्सा बन जाता है।
नवा रायपुर बनेगा टेक्नोलॉजी का नया ठिकाना?
AI मिशन के साथ नवा रायपुर में AI Data Centre Park विकसित करने की योजना भी सामने आई है।
यह छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ा बदलाव हो सकता है। अभी राज्य की अर्थव्यवस्था में mining, power और manufacturing का बड़ा योगदान है। Data centre जैसी परियोजनाएं आने से IT infrastructure, networking, cybersecurity, power supply और skilled employment जैसे क्षेत्रों में भी नई मांग पैदा हो सकती है।
लेकिन data centre लगाने के लिए सिर्फ जमीन पर्याप्त नहीं होती। लगातार बिजली, मजबूत नेटवर्क, बेहतर connectivity और trained manpower भी चाहिए।
इसलिए नवा रायपुर में बनने वाला संभावित AI ecosystem सिर्फ एक सरकारी project नहीं बल्कि infrastructure की पूरी श्रृंखला को प्रभावित करने वाला कदम हो सकता है।
2030 तक 5 हजार स्टार्टअप का लक्ष्य
सरकार ने 2030 तक 5,000 से अधिक startups तैयार करने का लक्ष्य रखा है। Startup Policy में भी इस दिशा में स्पष्ट लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल में युवाओं को job seeker से job creator बनाने की बात कही है।
बात सुनने में अच्छी लगती है, लेकिन startup की दुनिया में असली परीक्षा idea की नहीं, उसके टिकने की होती है।
किसी युवा के पास अच्छा business idea हो सकता है। लेकिन उसके बाद funding चाहिए, market चाहिए, mentor चाहिए और सबसे ज्यादा जरूरी है ग्राहक। अगर ये चीजें नहीं मिलतीं तो कई startups शुरुआती दौर में ही बंद हो जाते हैं।
छत्तीसगढ़ के लिए इसलिए सिर्फ 5,000 startups का आंकड़ा महत्वपूर्ण नहीं होगा। यह ज्यादा मायने रखेगा कि उनमें से कितने startups पांच साल बाद भी कारोबार कर रहे हैं और कितने लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
अगर सरकार इस ecosystem को मजबूत कर पाती है तो इसका फायदा सिर्फ IT background वाले युवाओं को नहीं होगा।
कृषि, पर्यटन, वन उत्पाद, handicraft, logistics, healthcare, education और food processing जैसे क्षेत्रों में भी स्थानीय startup खड़े हो सकते हैं।
अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण
2026 में युवाओं से जुड़ा एक और बड़ा फैसला अग्निवीरों को लेकर हुआ।
राज्य सरकार ने चार साल की सैन्य सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के लिए पुलिस, वन और जेल विभाग की सीधी भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया है। इसके लिए सेवा प्रमाणपत्र रखने वाले पात्र अग्निवीरों को लाभ दिया जाएगा।
इस फैसले की अहमियत इसलिए ज्यादा है क्योंकि अग्निवीर योजना में चार साल की सेवा पूरी करने के बाद आगे के रोजगार को लेकर युवाओं के बीच लगातार चर्चा रही है।
पुलिस या वन विभाग जैसी नौकरियों में सेना से मिले अनुशासन और प्रशिक्षण का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। हालांकि इसका वास्तविक लाभ कितने युवाओं को मिलेगा, यह भर्ती प्रक्रिया और उपलब्ध पदों पर निर्भर करेगा।
फिर भी रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह एक नया रास्ता जरूर है।
गांवों में इंटरनेट पहुंचाना भी बड़ी चुनौती
शहरों में 5G और हाई-स्पीड इंटरनेट की बात होती है, लेकिन छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में आज भी reliable connectivity अपने आप में खबर है।
BharatNet के तहत राज्य में ₹3,942 करोड़ के प्रावधान के साथ 11,682 ग्राम पंचायतों को जोड़ने और 8,328 गांवों में मांग के आधार पर broadband connectivity देने का लक्ष्य रखा गया है।
इसका मतलब सिर्फ गांव में Wi-Fi पहुंचना नहीं है।
अगर इंटरनेट स्थायी रूप से उपलब्ध होता है तो सरकारी सेवाओं के लिए लोगों को बार-बार तहसील या जिला मुख्यालय जाने की जरूरत कम हो सकती है। बच्चे ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। छोटे व्यापारी डिजिटल भुगतान और online marketplace का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसान बाजार और मौसम की जानकारी ले सकते हैं।
लेकिन connectivity के साथ एक दूसरी समस्या भी है—digital literacy।
जिस व्यक्ति को मोबाइल पर online form भरना ही नहीं आता, उसके लिए तेज इंटरनेट भी बहुत ज्यादा उपयोगी नहीं होगा। इसलिए digital infrastructure के साथ digital education भी जरूरी है।
सुशासन तिहार में सरकार पहुंची लोगों के बीच
2026 में सुशासन तिहार भी राज्य सरकार के प्रमुख अभियानों में रहा।
1 मई से 10 जून तक आयोजित अभियान में लोगों की समस्याएं सुनने और मौके पर उनका समाधान करने के लिए शिविर लगाए गए। जमीन, पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत, मनरेगा, प्रमाण पत्र और बिजली से जुड़े मामलों को इन शिविरों में लिया गया।
सरकारी दफ्तरों में एक आवेदन लेकर कई बार चक्कर लगाने की शिकायत आम है। ऐसे में अगर प्रशासन खुद लोगों के बीच पहुंचता है तो इससे कुछ राहत मिल सकती है।
लेकिन यहां भी वही सवाल है—शिविर में आवेदन ले लेना आसान हिस्सा है। असली काम तब शुरू होता है जब उस आवेदन का समाधान होना है।
कारोबारियों के लिए नियम आसान करने की कोशिश
छत्तीसगढ़ में उद्योग और निवेश बढ़ाने के लिए Ease of Doing Business पर भी काम किया गया है।
2026 में Chhattisgarh Ease of Doing Business Bill लाया गया, जिसका उद्देश्य कारोबार शुरू करने और regulatory compliance को आसान बनाना है। MSME sector के लिए self-certification और deemed approval जैसे प्रावधानों पर जोर दिया गया है।
किसी निवेशक के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है।
वह सिर्फ यह नहीं देखता कि राज्य में जमीन कितनी सस्ती है या बिजली उपलब्ध है। वह यह भी देखता है कि factory लगाने में कितने विभागों की अनुमति लेनी पड़ेगी और approval मिलने में कितना समय लगेगा।
अगर यह प्रक्रिया वास्तव में सरल होती है तो इसका फायदा बड़े उद्योगों के साथ छोटे और मध्यम कारोबारियों को भी मिल सकता है।
छत्तीसगढ़ अब सिर्फ खनिज राज्य नहीं रहना चाहता
छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत उसके प्राकृतिक संसाधन हैं। कोयला, लौह अयस्क, बिजली और इस्पात ने राज्य की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक दिशा दी है।
लेकिन समस्या यह है कि सिर्फ raw material आधारित economy में value addition का बड़ा हिस्सा दूसरे स्तर पर चला जाता है।
अब सरकार manufacturing और processing को राज्य के भीतर बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
Heavy equipment manufacturing, pharmaceutical sector, textile और food processing जैसे क्षेत्र इसी बदलाव का हिस्सा हैं।
अगर mining में इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी राज्य में बनने लगें, pharma manufacturing बढ़े और local products की processing यहीं हो तो राज्य में रोजगार की एक अलग श्रृंखला तैयार हो सकती है।
यही वह बदलाव है जिसे आने वाले कुछ सालों में देखना दिलचस्प होगा।
Pharma और Textile में भी नई संभावनाएं
नवा रायपुर में Pharma Park और pharmaceutical investments को लेकर भी काम आगे बढ़ रहा है। 2026 में राज्य में pharma sector से जुड़े निवेश प्रस्तावों की चर्चा हुई है।
इसके अलावा textile और garment manufacturing को भी बढ़ावा देने की कोशिश हो रही है। इसका सीधा फायदा महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों के रूप में हो सकता है।
छत्तीसगढ़ में agriculture और forest produce का बड़ा आधार है। अगर food processing और value addition को भी इसी के साथ जोड़ा जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में छोटे उद्योगों की भूमिका बढ़ सकती है।
बस्तर की कहानी सिर्फ नक्सलवाद तक सीमित नहीं
छत्तीसगढ़ की बात बस्तर के बिना अधूरी है।
लंबे समय तक बस्तर की खबरें मुख्य रूप से नक्सली हिंसा, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और मुठभेड़ों के आसपास रहती थीं। लेकिन अब सरकार बस्तर में सड़क, इंटरनेट, मोबाइल connectivity, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लेकर भी जोर दे रही है।
बस्तर की असली क्षमता उसके प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति, जंगल, हस्तशिल्प और आदिवासी उत्पादों में भी है।
अगर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ tourism और local business के अवसर बढ़ते हैं तो स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता खुल सकता है।
हालांकि बस्तर में विकास की चुनौती बाकी राज्य से अलग है। यहां सड़क बना देना ही पर्याप्त नहीं है। लोगों का विश्वास, सुरक्षा और स्थानीय जरूरतों के मुताबिक विकास—तीनों साथ चलने होंगे।
नदियों को बचाने के लिए Satellite Technology
पर्यावरण से जुड़ा एक और विषय 2026 में चर्चा में रहा।
छत्तीसगढ़ में नदियों के पुनर्जीवन के लिए satellite imagery और hydrological models जैसी तकनीक का इस्तेमाल करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
पहली नजर में यह तकनीकी विषय लग सकता है, लेकिन इसका सीधा संबंध खेती और ग्रामीण जीवन से है।
किसी नदी का पानी कम होना सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं है। इसका असर खेती, भूजल और गांवों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
अगर satellite data के जरिए यह समझने में मदद मिले कि पानी का flow कहां कम हुआ है, नदी के किनारे किस तरह का बदलाव आया है और recharge की संभावना कहां है, तो योजनाओं को ज्यादा वैज्ञानिक तरीके से बनाया जा सकता है।
Anti-Narcotics अभियान भी 2026 के एजेंडे में
राज्य सरकार ने नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने के लिए 10 जिलों में जिला स्तरीय Anti-Narcotics Task Force बनाने को मंजूरी दी। इसके लिए 100 नए पद स्वीकृत किए गए।
नशे का मुद्दा अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रह गया है। इसका असर युवाओं, परिवारों और सामाजिक व्यवस्था पर पड़ता है।
जिला स्तर पर अलग task force बनने से स्थानीय स्तर पर कार्रवाई को मजबूत करने की कोशिश की जा सकती है। लेकिन केवल गिरफ्तारी और जब्ती से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। Prevention और rehabilitation भी उतने ही जरूरी होंगे।
Cloud First Policy से सरकारी कामकाज में बदलाव
राज्य ने सरकारी IT infrastructure को cloud-based बनाने की दिशा में Cloud First Policy को भी आगे बढ़ाया है।
इसका उद्देश्य सरकारी digital systems को अधिक scalable और efficient बनाना है।
सरल भाषा में कहें तो सरकारी विभागों के data और digital services को आधुनिक cloud infrastructure पर ले जाने की कोशिश है।
यह कदम AI Mission के साथ भी जुड़ता है। क्योंकि बड़े पैमाने पर AI आधारित services चलाने के लिए मजबूत data infrastructure जरूरी होगा।
2026 की सबसे बड़ी चुनौती: घोषणा से जमीन तक
छत्तीसगढ़ में 2026 के अब तक के फैसलों को देखें तो योजनाओं की कमी नहीं दिखाई देती।
AI Mission है। Startup target है। BharatNet है। Agniveer reservation है। Ease of Doing Business है। Industrial investment है। Skill development है। बस्तर development है।
लेकिन किसी भी सरकार के लिए असली परीक्षा घोषणा के बाद शुरू होती है।
कितने startups वास्तव में शुरू हुए?
कितने AI labs काम करने लगे?
कितने विद्यार्थियों को training मिली?
कितने अग्निवीरों को आरक्षण का लाभ मिला?
कितने investment proposals factory में बदले?
कितने गांवों में broadband वास्तव में पहुंचा?
और कितनी सरकारी शिकायतों का समाधान हुआ?
इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों और वर्षों में ही मिलेंगे।
आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या है?
सरकारी योजनाओं और बजट की भाषा अक्सर इतनी तकनीकी होती है कि आम आदमी के लिए समझना मुश्किल हो जाता है कि इसका उसके जीवन से क्या संबंध है।
लेकिन तस्वीर सरल है।
अगर AI Mission सफल हुआ तो सरकारी सेवाएं और शिक्षा बदल सकती है।
अगर Startup ecosystem मजबूत हुआ तो युवाओं के लिए नौकरी के अलावा अपना कारोबार शुरू करने के रास्ते खुल सकते हैं।
अगर BharatNet जमीन पर सही तरीके से पहुंचा तो गांवों में ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।
अगर नए उद्योग वास्तव में स्थापित हुए तो स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ सकता है।
अगर बस्तर में infrastructure और tourism का विस्तार हुआ तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है।
और अगर Ease of Doing Business reforms कागज से निकलकर सरकारी दफ्तरों तक पहुंचे तो कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
2026 को कैसे याद किया जाएगा?
यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि 2026 छत्तीसगढ़ के विकास में निर्णायक मोड़ साबित हुआ या नहीं।
लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि इस साल राज्य सरकार ने कई ऐसे लक्ष्य सामने रखे हैं जो पारंपरिक छत्तीसगढ़ की तस्वीर से आगे की बात करते हैं।
एक तरफ खनिज और भारी उद्योग हैं, दूसरी तरफ AI और startups।
एक तरफ गांव और कृषि हैं, दूसरी तरफ data centre और advanced manufacturing।
एक तरफ बस्तर की सुरक्षा चुनौती है, दूसरी तरफ tourism और local economy की संभावनाएं।
इन सबको साथ लेकर चलना आसान नहीं होगा।
लेकिन अगर योजनाओं का क्रियान्वयन घोषणाओं की गति के बराबर रहा, तो अगले कुछ सालों में छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और रोजगार के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल 2026 की कहानी यही है—छत्तीसगढ़ अपनी पुरानी ताकतों को छोड़ नहीं रहा, लेकिन उनके ऊपर एक नई परत जोड़ने की कोशिश जरूर कर रहा है। अब असली सवाल यह है कि AI, startup, digital connectivity और नए उद्योगों की यह कहानी कागज से निकलकर जमीन तक कितनी दूर पहुंचती है।
नोट: यह लेख 24 अगस्त 2026 तक उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। योजनाओं के प्रावधान और क्रियान्वयन में आगे बदलाव संभव हैं।
