पूर्व NIAID अधिकारी डेविड मोरेंस और COVID-19 सरकारी रिकॉर्ड मामला

COVID-19 के रिकॉर्ड छिपाने के मामले में पूर्व NIAID अधिकारी डेविड मोरेंस ने कबूला गुनाह, जानें पूरा मामला

निजी Gmail से सरकारी कामकाज करने और FOIA से रिकॉर्ड बचाने का आरोप; कोरोना रिसर्च ग्रांट भी जांच के केंद्र में

वॉशिंगटन: कोरोना महामारी के दौरान सरकारी रिकॉर्ड को लेकर अमेरिका में चल रही एक अहम कानूनी कार्रवाई अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिका के National Institute of Allergy and Infectious Diseases (NIAID) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डेविड एम. मोरेंस ने संघीय अदालत में सरकारी रिकॉर्ड से जुड़े एक षड्यंत्र के आरोप में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, मोरेंस ने Freedom of Information Act (FOIA) और Federal Records Act से बचने की कोशिश से जुड़े षड्यंत्र में दोषी होने की बात मानी है।

यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसमें सरकारी कामकाज के लिए निजी ईमेल का इस्तेमाल, कोरोना रिसर्च से जुड़े सरकारी फंड और उन दस्तावेजों को सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश जैसे कई सवाल एक साथ जुड़े हैं।

डेविड मोरेंस कौन हैं?

78 वर्षीय डेविड मोरेंस ने NIAID के Office of the Director में 2006 से 2022 तक वरिष्ठ सलाहकार के तौर पर काम किया था। वे लंबे समय तक अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था और संक्रामक रोगों से जुड़े मामलों में वरिष्ठ स्तर पर सलाह देते रहे।

मामले की जांच FBI और अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के Inspector General कार्यालय ने की। अप्रैल 2026 में अमेरिकी न्याय विभाग ने उनके खिलाफ आरोप तय किए थे। अब अगस्त में उन्होंने एक संघीय साजिश के आरोप में दोष स्वीकार कर लिया है।

विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

मामले के केंद्र में एक बैट कोरोना वायरस रिसर्च ग्रांट है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस के उभरने के जोखिम को समझना था।

अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, NIH ने इस ग्रांट को बाद में समाप्त कर दिया था। इस फंडिंग का एक हिस्सा चीन के Wuhan Institute of Virology (WIV) तक पहुंचा था। ग्रांट खत्म होने के बाद मोरेंस और उनके साथ जुड़े लोगों पर इसे दोबारा बहाल कराने की कोशिश करने का आरोप लगा।

यहीं से मामला सिर्फ एक रिसर्च ग्रांट तक सीमित नहीं रहा। जांचकर्ताओं ने सरकारी रिकॉर्ड और अधिकारियों के बीच हुए निजी संचार पर भी ध्यान केंद्रित किया।

निजी Gmail का इस्तेमाल क्यों बना बड़ा मुद्दा?

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मोरेंस और उनके सहयोगियों को अंदेशा था कि उनकी बातचीत भविष्य में FOIA requests के जरिए मांगी जा सकती है।

इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर सरकारी NIH ईमेल की जगह मोरेंस के निजी Gmail अकाउंट का इस्तेमाल करने पर सहमति बनाई। उद्देश्य यह था कि बातचीत सार्वजनिक रिकॉर्ड की पहुंच से दूर रहे।

उस निजी ईमेल के जरिए कथित तौर पर गैर-सार्वजनिक NIH जानकारी साझा की गई। रिसर्च फंडिंग को लेकर बातचीत हुई और NIH के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे जाने वाले पत्रों के ड्राफ्ट पर भी चर्चा हुई।

यानी सवाल सिर्फ यह नहीं था कि ईमेल किस अकाउंट से भेजा गया। असली सवाल यह था कि क्या सरकारी काम से जुड़ी बातचीत को जानबूझकर सरकारी रिकॉर्ड सिस्टम से बाहर रखा गया?

मोरेंस के दोष स्वीकार करने के बाद यही हिस्सा मामले का सबसे अहम कानूनी पहलू बन गया है।

FOIA आखिर है क्या?

FOIA यानी Freedom of Information Act अमेरिका का पारदर्शिता कानून है। इसके तहत नागरिक और संगठन कई तरह के सरकारी रिकॉर्ड मांग सकते हैं। हालांकि कानून में कुछ सूचनाओं को सार्वजनिक करने से छूट भी दी गई है।

सरकारी अधिकारियों के लिए अपने आधिकारिक काम से जुड़े रिकॉर्ड को उचित सरकारी सिस्टम में रखना इसलिए जरूरी होता है ताकि भविष्य में कानून के तहत उनकी समीक्षा की जा सके।

इस मामले में अभियोजन पक्ष का कहना है कि निजी Gmail का इस्तेमाल इसी पारदर्शिता व्यवस्था से बचने के लिए किया गया था।

क्या कोरोना वायरस की उत्पत्ति भी इस मामले से जुड़ी है?

यहां एक बात साफ समझना जरूरी है। मोरेंस का दोष स्वीकार करना कोरोना वायरस की उत्पत्ति का कोई अंतिम जवाब नहीं है।

मामले में जिस रिसर्च ग्रांट का जिक्र है, उसका संबंध बैट कोरोना वायरस रिसर्च से था और WIV को दिए गए सब-अवार्ड की वजह से यह ग्रांट पहले से ही विवाद में रहा है। अभियोजन के मुताबिक, मोरेंस और उनके सहयोगियों ने ग्रांट की समाप्ति के बाद उसे बहाल कराने और इस दावे का विरोध करने की कोशिश की कि कोविड-19 लैब से लीक हुआ था।

इसलिए यह मामला रिकॉर्ड छिपाने और सरकारी प्रक्रियाओं से बचने के आरोप पर है, न कि अदालत द्वारा कोविड-19 की उत्पत्ति तय करने का मामला।

शराब की बोतल और दूसरे लाभ का भी जिक्र

दोष स्वीकार करने वाले दस्तावेजों में मोरेंस को दिए गए कथित उपहारों का भी उल्लेख है। न्याय विभाग के अनुसार, एक सह-साजिशकर्ता ने उन्हें शराब की बोतलें भेजीं और बदले में मोरेंस ने ऐसा आधिकारिक काम करने की पहचान की जिससे वह उपहार को “deserve” कर सकें।

दस्तावेजों में महंगे रेस्तरां में भोजन जैसे दूसरे लाभों की पेशकश का भी जिक्र है। अभियोजन के मुताबिक, यह हिस्सा कथित illegal gratuities से जुड़ा है।

अब मोरेंस को कितनी सजा हो सकती है?

मोरेंस को इस मामले में अधिकतम पांच साल तक की जेल हो सकती है। हालांकि अधिकतम सजा का मतलब यह नहीं है कि अदालत वही सजा अनिवार्य रूप से देगी। अंतिम फैसला संघीय अदालत करेगी और इसमें Sentencing Guidelines तथा दूसरे कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।

रॉयटर्स के अनुसार, मोरेंस की sentencing 12 नवंबर 2026 के लिए निर्धारित है।

इस मामले का बड़ा मतलब क्या है?

इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल कोरोना वायरस की उत्पत्ति से ज्यादा सरकारी पारदर्शिता का है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के लिए निजी ईमेल के जरिए सरकारी काम करना और कथित तौर पर रिकॉर्ड को FOIA की पहुंच से दूर रखना अमेरिकी प्रशासन में जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मोरेंस के दोष स्वीकार करने से यह मामला अब केवल आरोपों तक सीमित नहीं रहा। लेकिन कोविड-19 की उत्पत्ति, लैब-लीक थ्योरी या चीन की लैब की भूमिका जैसे बड़े सवालों पर अलग वैज्ञानिक और खुफिया जांचें जारी रही हैं। इसलिए इन मुद्दों को इस आपराधिक मामले के नतीजे से सीधे जोड़ना सही नहीं होगा।

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