CIMS अस्पताल पर हाईकोर्ट सख्त: पहुंच व्यवस्था और इमरजेंसी सेवाओं को लेकर उठाए गंभीर सवाल

 

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर एक बार फिर न्यायपालिका ने सख्त रुख अपनाया है। इस बार मामला बिलासपुर स्थित CIMS (छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) अस्पताल से जुड़ा है, जहां पहुंच और आपातकालीन सेवाओं में आ रही दिक्कतों को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने इस पूरे मामले की जांच के लिए तत्काल निरीक्षण (inspection) कराने का आदेश दिया है।

अदालत ने क्यों उठाया यह कदम?

यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए हाईकोर्ट के सामने आया था। याचिका में अस्पताल की कार्यप्रणाली, सुविधाओं और खासकर उसकी लोकेशन से जुड़ी समस्याओं को उजागर किया गया। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ—मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों ने पाया कि अस्पताल तक पहुंचना ही एक बड़ी समस्या बन चुका है। 

अदालत ने माना कि अगर किसी अस्पताल तक समय पर पहुंच ही न हो पाए, तो वहां मौजूद चिकित्सा सुविधाएं भी बेकार साबित हो सकती हैं। यही कारण है कि कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल निरीक्षण का आदेश दिया।

संकरी सड़कें और ट्रैफिक: सबसे बड़ी परेशानी

हाईकोर्ट ने खास तौर पर इस बात पर चिंता जताई कि CIMS अस्पताल जिस इलाके में स्थित है, वहां की सड़कें काफी संकरी हैं और आसपास भारी ट्रैफिक रहता है। इसके अलावा अस्पताल के गेट और दीवारों के पास अव्यवस्थित पार्किंग भी बड़ी समस्या बन गई है। 

ऐसी स्थिति में:

एम्बुलेंस समय पर अस्पताल तक नहीं पहुंच पाती

फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाएं बाधित हो सकती हैं

गंभीर मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है

कोर्ट ने साफ कहा कि यह स्थिति किसी भी बड़े सरकारी अस्पताल के लिए बेहद चिंताजनक है।

प्रशासन को दिए गए सख्त निर्देश

हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अस्पताल के आसपास की स्थिति को तुरंत सुधारा जाए। इसके तहत:

अतिक्रमण (encroachment) हटाया जाए

अवैध पार्किंग को खत्म किया जाए

रास्तों को खाली रखा जाए ताकि आपातकालीन वाहन आसानी से आ-जा सकें

इस काम के लिए कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और पुलिस अधीक्षक को जिम्मेदारी दी गई है। 

अदालत ने कहा कि अगर समय रहते ये कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं।

कोर्ट कमिश्नर करेंगे निरीक्षण

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किए हैं, जो अस्पताल का निरीक्षण करेंगे। ये कमिश्नर:

अस्पताल की वास्तविक स्थिति का जायजा लेंगे

पहुंच मार्ग (access routes) की जांच करेंगे

आपातकालीन व्यवस्था का मूल्यांकन करेंगे

उन्हें एक तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी। अगली सुनवाई में इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। 

मेडिकल उपकरणों की खरीद पर भी नजर

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अस्पताल में मेडिकल उपकरणों की उपलब्धता को लेकर भी जानकारी ली। राज्य की मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन द्वारा दिए गए हलफनामे में बताया गया कि:

कुल 13 श्रेणियों के उपकरणों में से 10 पहले ही अस्पताल को दिए जा चुके हैं

कुछ उपकरणों की प्रक्रिया अभी तकनीकी मूल्यांकन में है

कई उपकरणों के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है

कुछ मामलों में दोबारा टेंडर निकालना पड़ा है

वेंटिलेटर जैसे जरूरी उपकरण अभी भी प्रक्रिया में हैं 

कोर्ट ने इस पर भी निर्देश दिया कि सभी लंबित प्रक्रियाओं की अपडेटेड रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश की जाए।

क्या संकेत देता है यह मामला?

यह पूरा मामला सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी तस्वीर को दिखाता है।

मुख्य समस्याएं जो सामने आईं:

अस्पताल की गलत लोकेशन या प्लानिंग

ट्रैफिक और पार्किंग का सही प्रबंधन नहीं होना

जरूरी उपकरणों की खरीद में देरी

प्रशासनिक समन्वय की कमी

यह दर्शाता है कि केवल अस्पताल बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसकी पहुंच, संचालन और संसाधनों का सही प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है।

जनता के लिए क्या मायने?

इस फैसले का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। अगर कोर्ट के निर्देशों का सही तरीके से पालन होता है, तो:

मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा

एम्बुलेंस सेवाएं तेज और प्रभावी होंगी

अस्पताल तक पहुंचना आसान होगा

गंभीर मरीजों की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह कदम एक मजबूत संदेश देता है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। CIMS जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में अगर पहुंच और आपातकालीन सेवाएं ही बाधित हों, तो यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन कोर्ट के आदेशों को कितनी तेजी और गंभीरता से लागू करता है। आने वाले समय में कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट और अगली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *