CSMCL घोटाला: CDL के वाइस प्रेसिडेंट उदय राव गिरफ्तार, अरुणपति के द्वारा ढेबर को पंहुचा कमीशन

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रायपुर: छत्तीसगढ़ के CSMCL ओवरटाइम घोटाले में जांच एजेंसियों ने एक बहुत अहम कड़ी पकड़ी है। इस मामले में CDL के वाइस प्रेसिडेंट एन. उदय राव को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन जो बात सबसे ज्यादा हिला कर रख देने वाली है, वह यह है कि जांच में अब तक यह साफ हो चुका है कि पूर्व आबकारी सचिव अरुणपति त्रिपाठी के सीधे संपर्क में रहकर ही यह सारा कमीशन कारोबारी अनवर ढेबर तक पहुंचाया जा रहा था।

यानी, यह कोई आम घोटाला नहीं है। यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें ऊपर से लेकर नीचे तक हर कोई अपनी भूमिका निभा रहा था। अब तक इस केस में कुल 8 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, और एजेंसियों का कहना है कि अभी और भी बड़े नाम बाकी हैं।

आखिर है क्या यह पूरा मामला?

सीधे शब्दों में कहें तो… CSMCL (छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन) में कर्मचारियों के ओवरटाइम और बोनस के नाम पर फर्जी बिल बनाए जाते थे। असल में काम से कहीं ज्यादा का बिल काटा जाता था और बाकी का पैसा कमीशन के तौर पर कुछ लोगों तक पहुंचता था।

लेकिन असली खेल तो यह है कि यह पैसा किन-किन तक पहुंचता था और इस पूरे खेल को कौन संचालित कर रहा था।

अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर का कनेक्शन

जांच एजेंसियों को इस मामले में कई ऐसे दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे यह पुष्टि हो गई है कि अरुणपति त्रिपाठी ही इस पूरे नेटवर्क के सूत्रधार थे। उन्हीं के संपर्क और कहने पर यह कमीशन अनवर ढेबर तक पहुंचाया जाता था।

यानी, त्रिपाठी और ढेबर के बीच कभी भी सीधा लेन-देन नहीं होता था। बीच में कई लोगों का एक नेटवर्क था। एक छोर पर त्रिपाठी थे, दूसरे छोर पर ढेबर थे, और बीच में उदय राव जैसे लोग पैसे लाने-ले जाने का काम करते थे।

उदय राव की अहम भूमिका

अब आते हैं उदय राव पर। यह वो शख्स थे जो अरुणपति त्रिपाठी के बेहद करीब माने जाते थे। एजेंसियों के मुताबिक, उदय राव ही थे जो त्रिपाठी के इशारों पर CSMCL में पेमेंट, ऑर्डर और बिलिंग को अप्रूव करवाते थे।

और फिर इसी प्रक्रिया से जो कमीशन निकलता था, वह कई चैनलों से होता हुआ आखिरकार अनवर ढेबर तक पहुंच जाता था। यानी, उदय राव उस पुल की तरह थे, जो त्रिपाठी और ढेबर के बीच लगातार पैसों की आवाजाही करता था।

अब तक कौन-कौन गिरफ्तार?

इस मामले में अब तक जिन लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, उनमें ये नाम शामिल हैं:

  1. नीरज कुमार चौधरी – सीए, ईगल इंटर सॉल्यूशन व अलर्ट कमोडिटीज

  2. अजय लोहिया – डायरेक्टर, अलर्ट कमोडिटीज

  3. अजीत दरबले – डायरेक्टर, सुमित फैसिलिटीज

  4. अमित प्रभाकर सांडके – डायरेक्टर, सुमित फैसिलिटीज

  5. अमित मित्तल – चेयरमैन, ए-टू-ज़ेड इन्फ्रासर्विसेज

  6. राजीव द्विवेदी – डायरेक्टर, प्राइमवन वर्कफोर्स

  7. संजीव जैन – डायरेक्टर, प्राइमवन वर्कफोर्स

  8. एन. उदय राव – वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग), CDL

गौर करने वाली बात यह है कि इन सभी पर आरोप है कि ये उस चेन के हिस्से थे, जो अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर के बीच कमीशन पहुंचाने का काम करते थे।

और किन नामों की चर्चा?

अभी सिर्फ इन आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन जांच के दायरे में और भी बड़े नाम हैं। इनमें सबसे ऊपर हैं:

  • अरुणपति त्रिपाठी – पूर्व आबकारी विशेष सचिव (इन्हीं के संपर्क में रहकर कमीशन पहुंचाया जाता था)

  • अनवर ढेबर – कारोबारी (जिन तक आखिर में कमीशन पहुंचता था)

  • नीरज बंसल – पूर्व निदेशक

  • राजेश तिवारी – पूर्व निगम अध्यक्ष

एजेंसियां अब इन लोगों से पूछताछ की तैयारी में हैं। हो सकता है कि अगले कुछ दिनों में इनमें से किसी को भी हिरासत में लिया जाए।

शराब घोटाले से जुड़ा तार?

इस मामले की एक और दिलचस्प बात यह है कि इसी बीच शराब घोटाले से जुड़े आरोपी पप्पू बंसल और पीयूष बिजलानी को कोर्ट ने जमानत दे दी है। पप्पू बंसल पर करीब 1000 करोड़ रुपए के लेन-देन और शराब घोटाले की रकम की डिलीवरी के आरोप हैं।

बहुत से लोग यह मान रहे हैं कि ओवरटाइम घोटाला और शराब घोटाला आपस में जुड़े हुए हैं। कई नाम और लेन-देन दोनों मामलों में कॉमन हैं। अगर ऐसा है, तो यह छत्तीसगढ़ का अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक घोटाला साबित हो सकता है।

डिजिटल सबूतों से खुल रही पोल

एजेंसियां अब पारंपरिक जांच से आगे बढ़कर डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही हैं। बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल्स, व्हाट्सऐप चैट और ईमेल रिकॉर्ड्स – सबकी जांच हो रही है।

सूत्रों के मुताबिक, कई ऐसे रिकॉर्ड मिले हैं जिनसे यह साफ हो रहा है कि अरुणपति त्रिपाठी और उदय राव के बीच लगातार संपर्क था, और उसी के आधार पर पैसों की आवाजाही होती थी।

लोग क्या कह रहे हैं?

आम जनता में अब गुस्सा बढ़ता जा रहा है। लोग पूछ रहे हैं – “जब तक अरुणपति और ढेबर जैसे बड़े खिलाड़ी गिरफ्तार नहीं होंगे, तब तक बीच के छोटे-मोटे लोगों को पकड़ने से क्या होगा?”

राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर जमकर हंगामा हो रहा है। विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर है तो सत्ता पक्ष इसे पिछली सरकार का घोटाला बता रहा है। लेकिन सच तो यह है कि जब तक जांच सबसे ऊपर तक नहीं पहुंचती, तब तक लोगों का भरोसा वापस नहीं आएगा।

अब आगे क्या होगा?

ईओडब्ल्यू-एसीबी ने साफ कर दिया है कि जांच अभी थमने वाली नहीं है। उदय राव को गिरफ्तार करने के बाद अब उनसे गहन पूछताछ की जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर तक पैसे पहुंचाने की और कौन-कौन सी कड़ियाँ थीं।

उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ बहुत बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं।

यह घोटाला अब एक साधारण भ्रष्टाचार के मामले से बहुत आगे निकल चुका है। यह एक सिस्टमेटिक साजिश की कहानी है, जहाँ एक तरफ पूर्व आबकारी सचिव अरुणपति त्रिपाठी थे और दूसरी तरफ कारोबारी अनवर ढेबर। और बीच में थे उदय राव जैसे लोग, जो उनके संपर्क में रहकर कमीशन की सारी व्यवस्था चलाते थे।

अब देखना यह है कि क्या जांच एजेंसियां इन दोनों बड़े नामों तक पहुंच पाती हैं और क्या इनके खिलाफ ठोस कार्रवाई होती है। तब तक, यह मामला छत्तीसगढ़ की सियासत में उबाल बना रहेगा।

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