NEET 2026 का पेपर लीक हुआ, परीक्षा रद्द… छात्रों के भविष्य पर लगा प्रश्नचिह्न


पिछले कुछ दिनों से जिस बात की आशंका जताई जा रही थी, वह आखिरकार हो गई। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया गया है। एनटीए (NTA) ने यह फैसला पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद लिया है।

यह परीक्षा 3 मई को हो चुकी थी, और इसमें लगभग 24 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे। अब सारा खेल बिगड़ गया है। जिन छात्रों ने वर्षों से दिन-रात मेहनत की, उनके सामने फिर से वही पहाड़ खड़ा हो गया है।

पूरा मामला क्या है? सुनिए

परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर एक बात तेजी से फैलने लगी – “पेपर से पहले ही सवाल बाजार में आ गए थे।” दावा किया गया कि कोई “गेस पेपर” वायरल हुआ था, और चौंकाने वाली बात यह थी कि उसमें से काफी सवाल असली परीक्षा में भी आए।

एक बार यह बात फैल गई तो फिर सवाल उठना लाजिमी था। क्या परीक्षा सही तरीके से हुई? क्या मेहनत करने वालों के साथ धोखा हुआ?

इन सवालों का असर सड़कों पर भी दिखा। दिल्ली, पटना, लखनऊ और दूसरे शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन किए। मामला जैसे-जैसे बढ़ा, सरकार पर दबाव बढ़ता गया। और इसी दबाव में एनटीए ने परीक्षा रद्द करने का एलान कर दिया।

NTA एनटीए और सरकार क्या कह रही है?

एनटीए का कहना है – हम विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं कर सकते। अगर परीक्षा की पवित्रता पर संदेह हो, तो उसका परिणाम जारी करना उचित नहीं होगा। इसलिए यह कदम उठाना पड़ा।

सरकार ने भी जांच को गंभीरता से लिया है। केंद्रीय एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि आखिर लीक करने वाले कौन लोग थे और यह पूरा खेल किस तरह से खेला गया। कई राज्यों में छापेमारी और पूछताछ भी शुरू हो गई है।

लेकिन छात्रों के लिए यह सांत्वना भरा ही है, क्योंकि असली सवाल तो यही है कि अब उनका क्या होगा।

छात्रों में गुस्सा, निराशा और डर

सबसे बुरा हाल उन छात्रों का है, जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी थी। वे कह रहे हैं – “हमारी कोई गलती नहीं थी, फिर हमें सजा क्यों मिल रही है?” एक छात्र का बयान सामने आया – “हमने दो साल अपना कमरा तक नहीं छोड़ा था, और अब हमें दोबारा वही सब करना पड़ेगा। यह बिल्कुल सही नहीं है।”

कुछ छात्र तो यह भी कह रहे हैं कि अगर परीक्षा ही रद्द होनी थी, तो पहले क्यों नहीं की गई जांच? परीक्षा के बाद सब रद्द करना मानो दोगुना आघात है।

विरोध प्रदर्शन अब भी जारी हैं। हालांकि, सरकार के फैसले के बाद कुछ छात्रों ने अपना रोष जताना शुरू कर दिया है।

अब आगे क्या होगा?

NTA एनटीए ने यह साफ कर दिया है कि परीक्षा दोबारा होगी। हां, फिर से। लेकिन नई तारीख अभी तय नहीं हुई है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही नया शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा।

अच्छी बात यह है कि छात्रों को दोबारा फॉर्म नहीं भरना पड़ेगा। पुराने आवेदन ही मान्य रहेंगे और नए एडमिट कार्ड बन जाएंगे।

लेकिन बुरी बात यह है कि जो छात्र पहले ही मानसिक रूप से परीक्षा निपटा चुके थे, उन्हें फिर से तैयारी के लिए वापस लौटना होगा। और यही सबसे बड़ा दंश है।

बार-बार उठते सवाल, बार-बार होती गलतियाँ?

यह पहला मौका नहीं है जब एनटीए की परीक्षा को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी कई परीक्षाओं में पेपर लीक या तकनीकी गड़बड़ी की खबरें आ चुकी हैं।

अब सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर एक साल में इतनी बड़ी परीक्षा का सुरक्षा इंतजाम कैसे किया जाता है? क्या सिर्फ छापेमारी और गिरफ्तारियों से बात बनेगी? या फिर सिस्टम को जड़ से बदलना होगा?

विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अब समय आ गया है कि परीक्षा के पेपर ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज और डिजिटल इंतजामों को और अधिक सख्त बनाया जाए। तभी जाकर छात्रों का भरोसा वापस आएगा।

क्या परीक्षा रद्द करना सही था?

इस पर दो राय हैं। एक तरफ वे छात्र हैं जो बिना किसी गलती के परीक्षा देकर आए थे – उनका कहना है कि यह फैसला उनके साथ अन्याय है। वह कह रहे हैं कि “हमने तो सही तरीके से पेपर दिया था, फिर हमें दोबारा क्यों देना पड़ रहा है?”

वहीं दूसरी तरफ, यह भी तर्क है कि अगर पेपर लीक हुआ है, तो परीक्षा को रद्द करना ही सही रहेगा। अन्यथा, जिनके पास पहले से प्रश्न थे, उन्हें अनुचित लाभ मिलता और जिन्होंने ईमानदारी से मेहनत की, उनका नुकसान होता।

यानी हर तरफ से मामला पेचीदा है। परीक्षा रद्द करने के फैसले ने एक तरफ विश्वसनीयता बचाई है, तो दूसरी तरफ लाखों सच्चे छात्रों को निराशा दी है।

तो अब क्या?

अब सबकी नजरें एनटीए और सरकार पर टिकी हैं। छात्र चाहते हैं कि:

  • दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले।

  • नई परीक्षा की तारीख जल्द घोषित हो।

  • और सबसे जरूरी – परीक्षा इतनी सुरक्षित व्यवस्था में हो कि फिर कभी ऐसा मामला न आए।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के लिए यह संकट का समय है। उसे साबित करना होगा कि वह दोबारा होने वाली परीक्षा को बेहतर ढंग से आयोजित कर सकता है।

तब तक, लाखों छात्र एक बार फिर किताबों और रातों की नींद हराम करने को मजबूर हैं।


बस इतना ही। सच यही है कि NEET का यह विवाद अब सिर्फ एक परीक्षा रद्द करने की खबर नहीं रह गया है। यह पूरे देश के शिक्षा तंत्र पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *