फोन पर अभद्रता, अश्लील गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी का आरोप; सिटी कोतवाली पुलिस ने शुरू की जांच
रायपुर/छत्तीसगढ़: राजधानी रायपुर में नगर निगम की जोन क्रमांक-8 की जोन आयुक्त और कांग्रेस पार्षद संदीप साहू के बीच विवाद का मामला सामने आया है। जोन आयुक्त ने पार्षद पर फोन पर अभद्रता करने, अश्लील गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर सिटी कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रशिक्षण के दौरान आया फोन
शिकायत के मुताबिक, घटना अगस्त 2026 की बताई जा रही है। जोन आयुक्त नगर निगम मुख्यालय के सभाकक्ष में विज्ञापन से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद थीं। इसी दौरान वीर सावरकर नगर वार्ड क्रमांक-7 के पार्षद संदीप साहू के मोबाइल नंबर से उनके निजी मोबाइल फोन पर कॉल आया।
बताया गया है कि बातचीत की शुरुआत वार्ड से जुड़े सफाई कार्य और ठेकेदार के कर्मचारियों के भुगतान से संबंधित जानकारी लेने से हुई। पार्षद ने सफाई ठेकेदार के कर्मचारियों के भुगतान की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी।
बातचीत के दौरान विवाद बढ़ने का आरोप
जोन आयुक्त की शिकायत के अनुसार, बातचीत के दौरान मामला धीरे-धीरे विवाद में बदल गया। उन्होंने आरोप लगाया है कि पार्षद ने फोन पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और अश्लील गाली-गलौज की। शिकायत में जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
घटना के बाद जोन आयुक्त ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू कर दी।
पुलिस कर रही मामले की जांच
पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। मामले में फोन कॉल, बातचीत से जुड़े तथ्यों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जा सकती है। पुलिस जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
इस मामले ने नगर निगम के प्रशासनिक कामकाज और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है। सफाई व्यवस्था और ठेका कर्मचारियों के भुगतान जैसे मुद्दे पर हुई बातचीत के बाद विवाद पुलिस तक पहुंच गया है।
फिलहाल एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस दोनों पक्षों से जुड़े तथ्यों को सामने लाने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है।
नोट: यह खबर पुलिस में दर्ज शिकायत और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में आरोपी पक्ष का बयान सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
