नई दिल्ली। BRICS Summit 2026 के समापन सत्र में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ग्लोबल साउथ को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि BRICS देशों को उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहिए, ताकि वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित रखा जा सके और एक बड़ा इंटीग्रेटेड मार्केट तैयार किया जा सके। शी ने व्यापार, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने के लिए पांच-सूत्रीय पहल का भी प्रस्ताव रखा।
‘ग्लोबल साउथ की एकता से नई ताकत का अध्याय लिखें’
BRICS समिट के आखिरी सत्र में शी जिनपिंग ने सदस्य देशों से ग्लोबल साउथ के लिए एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि BRICS को अपनी बढ़ती ताकत का इस्तेमाल व्यावहारिक सहयोग और विकास के लिए करना चाहिए।
शी के मुताबिक, BRICS को अपने साथी उभरते बाजारों और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ करीबी संबंधों का लाभ उठाते हुए औद्योगिक और सप्लाई चेन की स्थिरता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही बड़े और एकीकृत बाजार के निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए।
‘ताकत ही सही है’ वाली सोच को छोड़ने की अपील
चीनी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में ताकत के आधार पर फैसले लेने की सोच की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ यानी ताकत ही सही है, इस तरह की सोच को काफी पहले छोड़ दिया जाना चाहिए था।
उन्होंने नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि बिना नियमों वाली दुनिया ऐसी है जैसे ट्रैफिक सिग्नल के बिना चौराहा। ऐसी स्थिति में अव्यवस्था और टकराव की आशंका बढ़ जाती है।
शी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियम किसी एक देश की ओर से तय नहीं किए जाने चाहिए, बल्कि सभी देशों को मिलकर उन्हें बनाने में भागीदारी करनी चाहिए।
संप्रभु समानता और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर
शी जिनपिंग ने ग्लोबल साउथ के देशों से अंतरराष्ट्रीय मामलों में कानून के शासन की रक्षा करने की अपील की। उन्होंने संप्रभु समानता, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल न देना और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान जैसे सिद्धांतों को मजबूत करने की बात कही।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और नियम सभी देशों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। किसी देश का आकार, आर्थिक ताकत या सैन्य क्षमता उसके लिए अलग नियम का आधार नहीं बन सकती।
शी ने दोहरे मापदंडों से बचने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय मामलों में पश्चिमी देशों की नीतियों पर अप्रत्यक्ष निशाने के तौर पर देखा जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग
चीनी राष्ट्रपति ने बहुपक्षवाद को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और अधिकार का सम्मान करते हुए बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार का समर्थन करना चाहिए।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में भी बदलाव की मांग की, ताकि विकासशील देशों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ सके। BRICS की नई दिल्ली घोषणा में भी वैश्विक संस्थाओं में उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की अधिक भागीदारी पर जोर दिया गया है।
AI से लेकर स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग तक 5 बड़ी पहल
शी जिनपिंग ने BRICS सहयोग को नई दिशा देने के लिए पांच प्रमुख पहल प्रस्तावित कीं।
1. ओपन और समावेशी AI पहल:
चीन BRICS AI ओपन-सोर्स कम्युनिटी बनाने की दिशा में पहल करेगा। इसमें बड़े भाषा मॉडल यानी Large Language Models के विकास और इस्तेमाल में सहयोग, AI प्रशिक्षण और विशेषज्ञ सेमिनार शामिल होंगे।
2. व्यापार और निवेश सुविधा पहल:
BRICS देशों के बीच व्यापार और निवेश को आसान बनाने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी का प्रस्ताव रखा गया है। चीन अगले साल BRICS Forum on Trade in Services की मेजबानी भी करेगा।
3. डिजिटल इंडस्ट्री सहयोग:
BRICS डिजिटल इकोसिस्टम क्लाउड प्लेटफॉर्म बनाने, डिजिटल स्किल ट्रेनिंग, तकनीकी आदान-प्रदान और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने की योजना है।
4. स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग:
चीन BRICS देशों को स्मार्ट फैक्ट्री विकसित करने, नए मानक तैयार करने और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को आधुनिक बनाने में सहयोग देने की बात कर रहा है।
5. विज्ञान और तकनीक सहयोग:
BRICS Engineer Cultivation Alliance बनाने का प्रस्ताव है। इसके जरिए इंजीनियरों के प्रशिक्षण और दक्षता मानकों की आपसी मान्यता पर काम किया जाएगा। साथ ही युवाओं के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार से जुड़े एक्सचेंज प्रोग्राम भी शुरू करने का प्रस्ताव है।
BRICS के बढ़ते प्रभाव के बीच चीन का संदेश
BRICS अब पहले की तुलना में काफी बड़ा समूह बन चुका है और इसका फोकस केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है। व्यापार, निवेश, तकनीक, वित्त, सप्लाई चेन और वैश्विक शासन जैसे मुद्दे भी इसके एजेंडे में तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं।
शी जिनपिंग का यह संदेश ऐसे समय आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार प्रतिबंधों, सप्लाई चेन में व्यवधान और तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में चीन BRICS को ग्लोबल साउथ के लिए ज्यादा व्यावहारिक आर्थिक और तकनीकी सहयोग के मंच के रूप में मजबूत करने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।
