छत्तीसगढ़ में DJ और ध्वनि प्रदूषण पर प्रस्तावित सख्त नियम

छत्तीसगढ़ में DJ और ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती, प्रस्तावित कोलाहल नियंत्रण कानून में कड़े प्रावधा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में तेज आवाज वाले DJ, साउंड सिस्टम और ध्वनि प्रदूषण को लेकर सरकार सख्त नियम बनाने की तैयारी में है। हाई कोर्ट की लगातार सख्ती के बीच राज्य में प्रस्तावित छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। हाई कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि नए कानून की प्रक्रिया लंबित होने के कारण मौजूदा ध्वनि प्रदूषण नियमों के पालन में किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

ध्वनि प्रदूषण को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहले भी राज्य सरकार को सख्त निर्देश दे चुका है। अगस्त 2025 में कोर्ट ने शासन को कोलाहल नियंत्रण कानून में आवश्यक बदलाव की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान तेज आवाज वाले DJ और साउंड सिस्टम से होने वाली परेशानी पर भी चिंता जताई गई थी।

बिना अनुमति DJ और साउंड सिस्टम पर कार्रवाई

प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर तेज आवाज में DJ और दूसरे ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित इस्तेमाल पर रोक लगाना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नए प्रावधानों में नियम तोड़ने वालों के खिलाफ मौजूदा व्यवस्था की तुलना में अधिक कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव है।

हालांकि, प्रस्तावित विधेयक के अंतिम प्रावधान और दंड की पुष्टि कानून के अंतिम रूप से पारित और लागू होने के बाद ही मानी जाएगी। इसलिए फिलहाल इसे लागू कानून के रूप में देखना सही नहीं होगा।

रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक शोर पर रोक

ध्वनि प्रदूषण से जुड़े मौजूदा नियमों में भी रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और ध्वनि पैदा करने वाले उपकरणों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है, सिवाय निर्धारित कानूनी अपवादों के।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में राज्य सरकार की ओर से पूर्व में जारी निर्देशों का भी उल्लेख है, जिनमें रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक शोर पैदा करने वाले उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

अस्पताल, स्कूल और कोर्ट के आसपास साइलेंस जोन

अस्पताल, शिक्षण संस्थान और न्यायालय जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को लेकर पहले से विशेष प्रावधान हैं। हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में 100 मीटर के दायरे में ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए प्रशासन को निर्देश दिए जाने का उल्लेख है।

इसका उद्देश्य अस्पतालों में मरीजों, स्कूलों में विद्यार्थियों और न्यायालयों में चलने वाली कार्यवाही को तेज आवाज से होने वाले व्यवधान से बचाना है।

हाई कोर्ट ने कहा- नए कानून का इंतजार नहीं

हालिया सुनवाई में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण बात कही है कि प्रस्तावित कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 की विधायी प्रक्रिया लंबित होने को मौजूदा कानून लागू करने में ढिलाई का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने वर्तमान कानून और सरकारी निर्देशों का सख्ती से पालन कराने पर जोर दिया है।

यानी नया कानून लागू होने से पहले भी DJ और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े मौजूदा नियम प्रभावी हैं और उनके उल्लंघन पर संबंधित अधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं।

पहले भी सामने आई तेज आवाज की समस्या

कोर्ट की सुनवाई के दौरान ध्वनि प्रदूषण के स्तर को लेकर गंभीर चिंता सामने आई थी। एक मामले में अदालत के रिकॉर्ड में त्योहारों के दौरान कुछ स्थानों पर DJ से 95 से 110 डेसिबल तक शोर रिकॉर्ड किए जाने की जानकारी दर्ज है। अदालत ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से प्रभावी कदम उठाने को कहा था।

इसके अलावा, कोर्ट ने DJ के साथ इस्तेमाल होने वाली तेज लेजर और बीम लाइट को लेकर भी चिंता जताई थी।

जनता से सुझाव लिए जाने की प्रक्रिया

प्रस्तावित कानून को अंतिम रूप देने से पहले जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां लेने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, 5 अक्टूबर 2026 तक सुझाव लेने और उसके बाद कानून को पूरी तरह लागू करने की बात की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो पाई है।

इसलिए अंतिम अधिनियम, उसकी अधिसूचना और लागू होने की तारीख सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि DJ संचालकों, आयोजकों और साउंड सिस्टम संचालकों पर कौन-कौन से नए दंड लागू होंगे।

DJ संचालकों के लिए भी स्पष्ट नियम जरूरी

ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती के साथ DJ संचालकों और आयोजकों की ओर से लंबे समय से स्पष्ट नियमों की मांग भी सामने आती रही है। हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में DJ संचालकों की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका का भी उल्लेख है, जिसमें कार्रवाई के लिए स्पष्ट गाइडलाइन की जरूरत बताई गई थी।

ऐसे में प्रस्तावित कानून का उद्देश्य केवल सजा बढ़ाना नहीं, बल्कि अनुमति, समय सीमा, ध्वनि स्तर, संवेदनशील क्षेत्रों और उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की स्पष्ट व्यवस्था तैयार करना भी होगा।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नया कानून अभी प्रस्तावित प्रक्रिया में है। अंतिम प्रावधान सामने आने के बाद ही जेल, जुर्माना, उपकरण जब्ती या नीलामी जैसे प्रावधानों की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

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