नई दिल्ली। BRICS Summit 2026 के समापन सत्र में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आर्थिक सहयोग को लेकर दो बड़ी पहल का प्रस्ताव रखा। उन्होंने BRICS देशों के लिए एक नया इंश्योरेंस मैकेनिज्म और साझा ग्रेन मार्केट यानी अनाज बाजार बनाने की बात कही। पुतिन का कहना है कि BRICS और ग्लोबल साउथ के देशों को वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर एक व्यापक रणनीति अपनानी चाहिए।
पुतिन का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब रूस लंबे समय से पश्चिमी देशों के आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और G7 देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें रूसी तेल के परिवहन और उससे जुड़ी बीमा सेवाओं पर भी पाबंदियां शामिल हैं। ऐसे में रूस BRICS के भीतर वैकल्पिक आर्थिक तंत्र विकसित करने पर जोर दे रहा है।
पुतिन बोले- बाहरी दबाव के बावजूद आगे बढ़ सकते हैं
BRICS के समापन सत्र में पुतिन ने कहा कि समूह के पास पूंजी, श्रम और तकनीक के लिए स्वतंत्र रास्ते विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने संकेत दिया कि BRICS देश बाहरी आर्थिक दबाव के बावजूद आपसी सहयोग के जरिए आगे बढ़ सकते हैं।
पुतिन ने कहा कि आने वाले समय के लिए रूस ने कुछ महत्वपूर्ण पहल प्रस्तावित की हैं। इनमें इंश्योरेंस मैकेनिज्म और ग्रेन मार्केट शामिल हैं। उन्होंने BRICS के दूसरे सदस्य देशों को इन पहलों में शामिल होने का न्योता दिया। हालांकि, अपने संबोधन में उन्होंने प्रस्तावित तंत्र की विस्तृत संरचना या इसे लागू करने की समयसीमा के बारे में जानकारी नहीं दी।
रूस पर प्रतिबंधों के बीच इंश्योरेंस मैकेनिज्म क्यों अहम?
रूस के लिए इंश्योरेंस सेक्टर काफी महत्वपूर्ण है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने रूसी तेल के अंतरराष्ट्रीय परिवहन और उससे जुड़ी सेवाओं को प्रभावित किया है। कई पश्चिमी बीमा कंपनियों के लिए रूसी कच्चे तेल को लेकर नियम और कीमत सीमा लागू की गई है।
ऐसे में BRICS के भीतर कोई वैकल्पिक बीमा व्यवस्था विकसित होती है तो सदस्य देशों के बीच व्यापार और समुद्री परिवहन के लिए एक नया रास्ता खुल सकता है। हालांकि, पुतिन के प्रस्ताव का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने BRICS देश इसमें शामिल होते हैं और इसका वित्तीय ढांचा किस तरह तैयार किया जाता है।
साझा ग्रेन मार्केट से खाद्य सुरक्षा पर जोर
पुतिन ने BRICS देशों के बीच साझा ग्रेन मार्केट बनाने का प्रस्ताव भी रखा। इसका उद्देश्य अनाज और कृषि उत्पादों के कारोबार को ज्यादा व्यवस्थित और सहयोग आधारित बनाना हो सकता है।
BRICS देशों में रूस, भारत, चीन, ब्राजील और अन्य बड़े उभरते बाजार शामिल हैं। इन देशों में कृषि उत्पादन और खाद्य पदार्थों की मांग दोनों का बड़ा हिस्सा है। ऐसे में अनाज बाजार से जुड़े सहयोग को खाद्य सुरक्षा, कीमतों की स्थिरता और आपूर्ति व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
BRICS के कृषि एजेंडे में पहले से ही कृषि उत्पादकता, डिजिटल कृषि, एग्रो-टेक्नोलॉजी और किसानों के अधिकार जैसे मुद्दे शामिल हैं। 2026 के शिखर सम्मेलन में कृषि सहयोग से जुड़ी कई नई पहल भी सामने आई हैं।
NDB की तारीफ, 140 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट का दावा
रूसी राष्ट्रपति ने New Development Bank (NDB) के कामकाज की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि बैंक करीब 140 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट्स को संभाल रहा है।
NDB की स्थापना BRICS देशों ने विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी। 2026 BRICS Summit में भी बैंक की सदस्यता बढ़ाने, वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने और ग्लोबल साउथ में विकास परियोजनाओं के लिए नए वित्तीय तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया है।
ग्लोबल साउथ के लिए पुतिन का संदेश
पुतिन ने कहा कि दुनिया के सामने लगातार नई चुनौतियां उभर रही हैं और इनसे निपटने के लिए केवल तत्काल समस्याओं पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने देशों से समस्याओं के लक्षणों के साथ-साथ उनके मूल कारणों पर भी काम करने की अपील की।
उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों से बेहतर वैश्विक शासन व्यवस्था के निर्माण के लिए मिलकर काम करने और पारंपरिक तथा गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की बात कही।
BRICS का बढ़ता प्रभाव
पुतिन ने कहा कि BRICS का अंतरराष्ट्रीय महत्व लगातार बढ़ रहा है और विभिन्न देशों की इसमें बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है। 2026 में भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS Summit में समूह के आर्थिक, वित्तीय, तकनीकी और वैश्विक शासन से जुड़े एजेंडे पर व्यापक चर्चा हुई।
रूस के प्रस्ताव को BRICS के भीतर वैकल्पिक आर्थिक तंत्र बनाने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जा सकता है। वहीं, भारत सहित कई सदस्य देश BRICS को किसी एक देश या पश्चिम-विरोधी मंच के बजाय विकास, व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग के मंच के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर देते रहे हैं।
