BRICS Summit में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

BRICS Summit: पुतिन के नए इंश्योरेंस और ग्रेन मार्केट प्रस्ताव से भारत को क्या फायदा? जानिए 5 बड़े असर

BRICS Summit: पुतिन के नए इंश्योरेंस और ग्रेन मार्केट प्रस्ताव से भारत को क्या फायदा? जानिए 5 बड़े असर

नई दिल्ली। भारत में आयोजित 18वें BRICS Summit के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दो ऐसे प्रस्ताव रखे हैं, जिनका असर आने वाले समय में भारत समेत पूरे ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। पुतिन ने BRICS देशों के बीच एक नया इंश्योरेंस मैकेनिज्म और साझा ग्रेन मार्केट यानी अनाज बाजार बनाने की पहल का प्रस्ताव रखा है। खास बात यह है कि ये प्रस्ताव ऐसे समय आए हैं जब रूस पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और वैश्विक व्यापार में बीमा, भुगतान तथा सप्लाई चेन से जुड़ी मुश्किलें बढ़ी हैं।

पुतिन ने BRICS के समापन सत्र में कहा कि समूह के पास पूंजी, श्रम और तकनीक के लिए स्वतंत्र रास्ते विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने दूसरे सदस्य देशों को रूस की ओर से प्रस्तावित इन पहलों में शामिल होने का न्योता दिया। हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित इंश्योरेंस सिस्टम का ढांचा कैसा होगा और इसमें कौन-कौन सी संस्थाएं शामिल होंगी।

1. भारत के लिए सबसे बड़ा फायदा: व्यापार में वैकल्पिक बीमा व्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बीमा बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर समुद्री व्यापार में जहाज, कार्गो और ऊर्जा की खेप के लिए बीमा के बिना बड़े स्तर पर कारोबार करना मुश्किल होता है।

रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण उसके तेल कारोबार से जुड़ी बीमा व्यवस्था प्रभावित हुई है। पुतिन का प्रस्ताव इसी चुनौती के बीच आया है। अगर BRICS देश मिलकर कोई भरोसेमंद बीमा या पुनर्बीमा व्यवस्था विकसित करते हैं, तो भविष्य में सदस्य देशों के बीच व्यापार के लिए पश्चिमी वित्तीय और बीमा संस्थानों पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है।

भारत के लिए इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि रूस भारत का बड़ा ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में रूस-भारत के बीच तेल और अन्य वस्तुओं के व्यापार में बीमा और भुगतान से जुड़ी बाधाएं कम होना भारतीय कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

2. रूसी तेल की सप्लाई में भारत को मिल सकता है अप्रत्यक्ष फायदा

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। रूस से कच्चे तेल की खरीद ने पिछले कुछ वर्षों में भारत के ऊर्जा आयात के समीकरण को बदला है।

अगर BRICS के भीतर व्यापारिक और वित्तीय ढांचे मजबूत होते हैं, तो भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार के लिए वैकल्पिक रास्ते विकसित किए जा सकते हैं। इससे किसी एक वित्तीय या बीमा प्रणाली पर निर्भरता घट सकती है।

हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगा कि पुतिन के प्रस्ताव से भारतीय तेल कंपनियों को तुरंत कोई सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके लिए प्रस्ताव का वास्तविक ढांचा, नियम और सदस्य देशों की भागीदारी सामने आना जरूरी है।

3. ग्रेन मार्केट से खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा

पुतिन का दूसरा बड़ा प्रस्ताव BRICS Grain Market यानी साझा अनाज बाजार को लेकर है।

भारत जैसे बड़े खाद्य बाजार के लिए यह पहल महत्वपूर्ण हो सकती है। रूस दुनिया के प्रमुख अनाज निर्यातकों में है, जबकि भारत भी कृषि उत्पादन और खाद्य खपत के मामले में दुनिया के सबसे बड़े देशों में शामिल है।

अगर BRICS देशों के बीच अनाज के व्यापार के लिए एक व्यवस्थित बाजार या एक्सचेंज विकसित होता है, तो इससे उत्पादकों और खरीदारों को नए बाजार मिल सकते हैं। साथ ही आपूर्ति में विविधता बढ़ने से खाद्य सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

BRICS के कृषि एजेंडे में पहले से ही डिजिटल कृषि, कृषि संसाधनों और किसानों से जुड़े सहयोग को बढ़ाने की दिशा में पहल हो रही है। ऐसे में रूस का ग्रेन मार्केट प्रस्ताव इसी बड़े कृषि सहयोग का हिस्सा बन सकता है।

4. किसानों और कृषि कारोबार के लिए नए बाजार खुल सकते हैं

भारत के लिए सिर्फ गेहूं या चावल ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। कृषि क्षेत्र में दालें, खाद्य तेल, मक्का, पशु आहार और अन्य कृषि उत्पादों का भी बड़ा कारोबार है।

BRICS के भीतर कृषि व्यापार बढ़ने से भारतीय कृषि-निर्यातकों को नए बाजार मिल सकते हैं। खासकर अगर भुगतान प्रणाली, लॉजिस्टिक्स और व्यापार नियमों को सरल बनाया जाता है तो छोटे और मध्यम कृषि कारोबारियों को भी फायदा हो सकता है।

हालांकि, इसके लिए भारत को अपने किसानों और घरेलू खाद्य सुरक्षा के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यापार नीति तैयार करनी होगी।

5. BRICS का नया आर्थिक मॉडल भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

पुतिन का प्रस्ताव सिर्फ बीमा और अनाज तक सीमित नहीं है। BRICS में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल, सीमा पार भुगतान, सप्लाई चेन, निवेश और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने की चर्चा भी हो रही है। भारत की अध्यक्षता वाले इस सम्मेलन में आर्थिक सहयोग को व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया है।

BRICS अब 11 सदस्य देशों का समूह है और इसका आर्थिक तथा जनसांख्यिकीय वजन काफी बढ़ चुका है। भारत की कोशिश रही है कि BRICS को केवल भू-राजनीतिक मंच बनाने के बजाय विकास, व्यापार, तकनीक और वैश्विक संस्थाओं में सुधार के लिए व्यावहारिक मंच बनाया जाए।

क्या BRICS पश्चिमी व्यवस्था का विकल्प बन जाएगा?

यह सबसे बड़ा सवाल है। पुतिन की पहल को पश्चिमी वित्तीय और व्यापारिक व्यवस्था पर निर्भरता कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन BRICS के सभी देशों के आर्थिक हित एक जैसे नहीं हैं।

भारत पश्चिमी देशों के साथ भी बड़े स्तर पर व्यापार करता है और अमेरिका तथा यूरोप उसके प्रमुख आर्थिक साझेदारों में हैं। इसलिए भारत के लिए ज्यादा व्यावहारिक रास्ता किसी एक गुट को चुनने के बजाय वैकल्पिक आर्थिक विकल्प तैयार करना हो सकता है।

यही वजह है कि BRICS में बीमा, भुगतान, कृषि, डिजिटल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।

निष्कर्ष

पुतिन के नए इंश्योरेंस मैकेनिज्म और BRICS ग्रेन मार्केट के प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में हैं। इनके वास्तविक फायदे इस बात पर निर्भर करेंगे कि सदस्य देश इन्हें किस तरह लागू करते हैं। लेकिन अगर ये योजनाएं व्यावहारिक रूप लेती हैं, तो भारत को ऊर्जा व्यापार, कृषि बाजार, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सेवाओं और ग्लोबल साउथ के साथ कारोबार में नए विकल्प मिल सकते हैं।

यानी फिलहाल इसे किसी मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की बजाय BRICS देशों के लिए एक अतिरिक्त और वैकल्पिक आर्थिक ढांचा तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।

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