नई दिल्ली। NEET जैसी बड़ी परीक्षा की सुरक्षा आखिर कितनी मजबूत है? सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान यही सवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में रहा। अदालत ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की मौजूदा परीक्षा व्यवस्था पर सीधे सवाल उठाने के बजाय यह संकेत दिया कि समय के साथ सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने NTA को सलाह दी कि वह संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की कार्यप्रणाली से भी सीख ले। अदालत ने यह भी कहा कि परीक्षा सुरक्षा के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेना जरूरी हो सकता है। मामला सिर्फ एक परीक्षा का नहीं है। NEET में हर साल लाखों छात्र बैठते हैं और उनकी वर्षों की मेहनत इस एक परीक्षा से जुड़ी होती है।
पिछले कुछ समय में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों और पेपर लीक के मामलों ने छात्रों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी अहम मानी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
बुधवार को हुई सुनवाई जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के सामने हुई। सुनवाई के दौरान परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और उसमें संभावित सुधारों पर चर्चा हुई।
अदालत ने NTA को यह सुझाव दिया कि वह UPSC की परीक्षा प्रणाली और उसकी कार्यप्रणाली से सीख ले सकती है। साथ ही, आधुनिक तकनीक को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने और तकनीकी विशेषज्ञों को प्रक्रिया से जोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की चिंता साफ थी—इतनी बड़ी परीक्षा को केवल पुराने ढांचे के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। अगर तकनीक के जरिए सुरक्षा मजबूत हो सकती है, तो उस दिशा में कदम उठाने चाहिए।
NTA को भंग करने की मांग भी अदालत पहुंची
इस मामले में यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और कुछ अन्य संगठनों की ओर से याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग की है। कुछ याचिकाओं में NTA को भंग कर नई और ज्यादा पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग भी उठाई गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि NEET जैसी परीक्षा में छात्रों का भरोसा सबसे अहम है। एक छात्र कई साल तक तैयारी करता है, परिवार भी उसके साथ उम्मीदें जोड़ता है। ऐसे में अगर परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो उसका असर सिर्फ परिणाम पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर पड़ता है।
केंद्र सरकार ने अदालत में क्या कहा?
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि NEET परीक्षा की मौजूदा व्यवस्था में कई स्तरों पर सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
सरकार के मुताबिक, प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने तक पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग चरणों में निगरानी की जाती है। प्रश्नपत्र तक किसी अनधिकृत व्यक्ति की पहुंच रोकने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
सरकार ने यह भी बताया कि NEET के लिए पहले एक बड़ा प्रश्न बैंक तैयार किया जाता है। इसके लिए विषय विशेषज्ञों की मदद ली जाती है। बाद में अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं और तय प्रक्रिया के तहत उनका चयन किया जाता है।
13 भाषाओं में तैयार होते हैं सवाल
NEET देश के अलग-अलग हिस्सों के छात्र देते हैं। इसी वजह से प्रश्नपत्रों को 13 भाषाओं में तैयार किया जाता है।
सरकार का कहना है कि सवालों का अनुवाद किसी सामान्य स्वचालित प्रक्रिया से नहीं किया जाता, बल्कि इसमें विशेषज्ञों की मदद ली जाती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भाषा बदलने के साथ सवाल का अर्थ न बदल जाए।
यह एक छोटी बात नहीं है। किसी प्रश्न के अनुवाद में मामूली गलती भी छात्रों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रश्नपत्र की भाषा और उसकी गुणवत्ता भी परीक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
प्रिंटिंग प्रेस से परीक्षा केंद्र तक सुरक्षा
सरकार ने अदालत को बताया कि प्रश्नपत्रों की छपाई निर्धारित प्रिंटिंग प्रेस में की जाती है। वहां सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा व्यवस्था के जरिए निगरानी रखी जाती है।
प्रिंटिंग के बाद प्रश्नपत्रों को सुरक्षित बक्सों में रखा जाता है और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। इन्हें ले जाने वाले वाहनों की निगरानी के लिए जीपीएस जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है।
परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र निर्धारित समय के आसपास खोले जाते हैं। सरकार के मुताबिक, इस प्रक्रिया में भी निगरानी और रिकॉर्डिंग की व्यवस्था रहती है।
फिर सुप्रीम कोर्ट को सुधार की जरूरत क्यों महसूस हुई?
यहीं इस सुनवाई की सबसे अहम बात सामने आती है। सरकार का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था सुरक्षित है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का सुझाव है कि सुरक्षा व्यवस्था को यहीं नहीं रुकना चाहिए।
तकनीक तेजी से बदल रही है और उसके साथ सुरक्षा से जुड़े खतरे भी बदलते रहते हैं। ऐसे में परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों को भी लगातार अपने सिस्टम की समीक्षा करनी होगी।
अदालत का जोर इस बात पर है कि किसी बड़ी समस्या के सामने आने के बाद सुधार करने के बजाय पहले से ही ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें कमियां पकड़ना और उन्हें दूर करना आसान हो।
लाखों छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
NEET सिर्फ एक प्रवेश परीक्षा नहीं है। यह उन लाखों छात्रों के लिए एक रास्ता है जो डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। कई छात्र लंबे समय तक कोचिंग और पढ़ाई में जुटे रहते हैं।
ऐसे में परीक्षा की निष्पक्षता पर उठने वाला हर सवाल सीधे छात्रों की मेहनत और उनके भविष्य से जुड़ जाता है।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई से फिलहाल इतना जरूर साफ है कि परीक्षा सुरक्षा, तकनीकी सुधार और पारदर्शिता के मुद्दे पर चर्चा अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और NTA की व्यवस्था में किसी बदलाव की जरूरत बताती है या नहीं, इस पर छात्रों की नजर रहेगी।
फिलहाल मामला विचाराधीन है। लेकिन इस सुनवाई ने एक बड़ा सवाल जरूर सामने रख दिया है—देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में शामिल छात्रों का भरोसा बनाए रखने के लिए क्या मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है, या अब सिस्टम को नए तरीके से मजबूत करने का समय आ गया है?
