जयशंकर की दोटूक: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत में भारत ने जताया कड़ा विरोध

Photo: Jayshankar CC Flikr


ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों वाले तेल टैंकर पर हमले से भारत नाराज़, तीन नाविकों की मौत पर सख्त रुख


नई दिल्ली। ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों से जुड़े एक तेल टैंकर पर हुए घातक हमले को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत के दौरान इस घटना पर गहरा विरोध दर्ज कराया और साफ कहा कि कमर्शियल जहाजों पर ऐसे हमले किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जिससे देश में गहरा रोष है। भारत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चिंता जाहिर की है और समुद्री सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश दिया है।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, भारत ने इस दावे को तुरंत स्वीकार नहीं किया है और मामले की स्वतंत्र जांच पर जोर दिया है। भारत का मानना है कि बिना ठोस सबूत के किसी भी देश पर आरोप लगाना उचित नहीं है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने बातचीत के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कमर्शियल शिपिंग पर इस तरह के हमले न केवल मानव जीवन के लिए खतरा हैं, बल्कि वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डाल सकते हैं।

भारत ने इस घटना को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि दोषियों को जल्द से जल्द जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। साथ ही, भारत ने अपने नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।

राजनयिक सूत्रों का कहना है कि भारत इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भी लगातार संपर्क में है। भारत का प्रयास है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब मध्य-पूर्व क्षेत्र पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहा है। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और भी अहम हो जाती है। भारत का संतुलित लेकिन सख्त रुख यह दर्शाता है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है।

कुल मिलाकर, इस मुद्दे पर भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह किसी भी प्रकार की आक्रामकता या असुरक्षा को बर्दाश्त नहीं करेगा। आने वाले दिनों में इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी चर्चा होने की संभावना है।

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