Supreme Court Wikimedia Commons

CBSE 3 Language Policy: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव, कक्षा 6 में तीन भाषा नीति 2027 तक टल सकती है

नई दिल्ली। CBSE की तीन भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा सुझाव दिया है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से कहा कि वह कक्षा 6 के मौजूदा छात्रों के लिए तीन भाषा की अनिवार्यता को फिलहाल टालने और नई व्यवस्था को 2027 से शुरू होने वाले अगले बैच पर लागू करने पर विचार करे।

पीठ में चीफ जस्टिस सूर्य कांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि नई भाषा नीति को अचानक लागू करने से छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों के सामने व्यावहारिक दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।

मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को मिल सकती है राहत

सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि जो विद्यार्थी अभी कक्षा 6 में पढ़ रहे हैं, उन्हें तीन भाषा की नई व्यवस्था से एक बार की राहत दी जा सकती है। कोर्ट के मुताबिक, इन छात्रों ने पहले से एक भाषा व्यवस्था के तहत अपनी पढ़ाई शुरू कर दी है, इसलिए बीच शैक्षणिक सत्र में नई व्यवस्था लागू करना उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

कोर्ट ने सुझाव दिया कि अगर तीन भाषा नीति को लागू करना है तो इसे अगले बैच के छात्रों के लिए 2027 से लागू किया जा सकता है। इससे स्कूलों, शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों को नई व्यवस्था के लिए तैयारी का पर्याप्त समय मिलेगा।

अभी फैसला CBSE को करना है

सुनवाई के दौरान CBSE की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर विचार करेगा और इस संबंध में निर्देश लेकर वापस आएगा।

इसका मतलब यह है कि गुरुवार की सुनवाई के बाद अभी CBSE की ओर से अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि उसके सुझाव याचिकाकर्ताओं और केंद्र सरकार के अधिकारों या उनके कानूनी तर्कों पर कोई अंतिम राय व्यक्त किए बिना दिए जा रहे हैं। नीति की वैधता से जुड़े मूल सवालों पर बाद में फैसला हो सकता है।

छात्र चाहें तो तीन भाषाएं पढ़ने का विकल्प?

सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को एक और विकल्प देने का सुझाव दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर वर्तमान कक्षा 6 के कुछ विद्यार्थी इसी शैक्षणिक वर्ष में तीन भाषाएं पढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें स्वेच्छा से ऐसा करने का विकल्प दिया जा सकता है।

इस तरह मौजूदा छात्रों पर नई व्यवस्था अचानक अनिवार्य करने के बजाय उन्हें परिस्थितियों के अनुसार विकल्प देने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। अब इस पर CBSE का अगला रुख महत्वपूर्ण होगा।

तीन भाषा नीति में क्या है नियम?

CBSE की नई व्यवस्था के तहत छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना है। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होनी चाहिए।

भारतीय भाषाओं में हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, ओडिया और असमिया जैसी भाषाएं शामिल हैं। वहीं अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश जैसी भाषाओं को गैर-भारतीय भाषाओं के उदाहरण के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

CBSE ने यह व्यवस्था नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बहुभाषी शिक्षा के दृष्टिकोण के अनुरूप लागू करने की दिशा में कदम उठाया है। हालांकि, इस नीति को लेकर छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों की ओर से कई व्यावहारिक सवाल उठाए गए हैं।

शिक्षकों और किताबों की उपलब्धता पर भी सवाल

सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी तीन भाषा नीति पर सुनवाई के दौरान यह सवाल उठा चुका है कि CBSE से जुड़े कितने स्कूलों में अलग-अलग भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित शिक्षक और अध्ययन सामग्री उपलब्ध है।

अदालत ने भाषा नीति को लागू करने से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षक और पाठ्य सामग्री की उपलब्धता पर भी जानकारी मांगी थी।

यही वजह है कि कोर्ट ने नई व्यवस्था को अचानक लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू करने की संभावना पर जोर दिया है।

कक्षा 9 को लेकर क्या है व्यवस्था?

CBSE की नई भाषा व्यवस्था को लेकर कक्षा 9 के छात्रों के लिए भी अलग प्रावधान लागू किए गए हैं। बोर्ड के अनुसार कक्षा 9 के विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी और इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।

हालांकि, कक्षा 7, 8 और 9 से संबंधित प्रावधानों और उनके क्रियान्वयन को लेकर अलग-अलग राहत एवं व्यवस्थाओं पर भी अदालत के सामने दलीलें रखी गई हैं। मौजूदा सुनवाई मुख्य रूप से कक्षा 6 के छात्रों के लिए नई व्यवस्था लागू करने के समय और तरीके से जुड़ी है।

27 मई को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था मामला

CBSE की तीन भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को सुनवाई के लिए सहमति जताई थी। अदालत ने केंद्र सरकार, CBSE और NCERT को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

इसके बाद जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल नीति पर रोक लगाने से इनकार किया था, लेकिन मामले की सुनवाई जारी रखी। जुलाई की सुनवाई में अदालत ने यह टिप्पणी भी की थी कि भाषा सीखना अपने आप में व्यर्थ नहीं जाता।

अब 17 सितंबर की सुनवाई में कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने और तीन भाषा नीति को अगले बैच से लागू करने के सुझाव पर CBSE से विचार करने को कहा है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल गेंद CBSE के पाले में है। बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर विचार कर अगली सुनवाई में अपना रुख बताना है। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि 2026-27 में कक्षा 6 के मौजूदा छात्रों के लिए तीन भाषा नीति अनिवार्य रहेगी या उन्हें एक बार की राहत मिलेगी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी तीन भाषा नीति को रद्द नहीं किया है और न ही अंतिम फैसला सुनाया है। अदालत ने फिलहाल छात्रों को अचानक नई व्यवस्था में डालने के बजाय उसके चरणबद्ध क्रियान्वयन पर विचार करने को कहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *