तीसरे दीक्षांत समारोह में बोले उपराष्ट्रपति—डिग्री के साथ मरीजों के स्वास्थ्य, भरोसे और जीवन की जिम्मेदारी भी; AIIMS रायपुर ने चिकित्सा के क्षेत्र में बनाई अलग पहचान
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बदलते दौर को लेकर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को एक अहम टिप्पणी की। AIIMS रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान केवल चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के उस बदलाव का भी प्रतीक है, जहां राज्य ने वामपंथी उग्रवाद, भय और अभाव के दौर से निकलकर शांति, विकास और नए अवसरों की ओर कदम बढ़ाया है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी मेडिकल संस्थान का दीक्षांत समारोह सिर्फ डिग्री हासिल करने का अवसर नहीं होता। इसके साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। उन्होंने मेडिकल छात्रों से कहा कि अब उनके हाथों में लोगों का स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन रहेगा। इसलिए डॉक्टर और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के लिए ज्ञान के साथ संवेदनशीलता, ईमानदारी और सेवा की भावना भी उतनी ही जरूरी है।
2012 में स्थापना के बाद तेजी से बढ़ा AIIMS रायपुर
AIIMS रायपुर की स्थापना वर्ष 2012 में हुई थी। कम समय में संस्थान ने मध्य भारत में उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं, मेडिकल शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपनी जगह बनाई है। इसका लाभ केवल रायपुर या छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी राज्यों और ग्रामीण तथा आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भी मिल रहा है।
AIIMS रायपुर की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक संस्थान ने पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा सेवाओं के साथ तकनीक और रिसर्च के क्षेत्र में भी विस्तार किया है। संस्थान NIRF 2025 मेडिकल रैंकिंग में 31वें स्थान पर पहुंचा, जबकि 2024 में इसकी रैंकिंग 38वीं थी। इसके अलावा ‘देव हस्त’ के तहत सेंट्रल इंडिया के पहले सरकारी क्षेत्र के रोबोटिक सर्जरी कार्यक्रम और AI Lab जैसी पहल भी शुरू की गई हैं।
छत्तीसगढ़ के विकास से जोड़ा AIIMS का सफर
राधाकृष्णन ने कहा कि AIIMS रायपुर का विस्तार राज्य में हो रहे व्यापक बदलाव को भी दिखाता है। उनके मुताबिक जिन इलाकों की पहचान कभी हिंसा और असुरक्षा से होती थी, वहां अब सड़क, स्कूल, अस्पताल, कनेक्टिविटी, निवेश और रोजगार के अवसरों की चर्चा हो रही है।
उन्होंने इस बदलाव के पीछे मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, सुरक्षा नीति और विकास आधारित शासन को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब देश का हर राज्य, जिला और गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े।
376 छात्राओं और 313 छात्रों को मिली डिग्री
तीसरे दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को विभिन्न चिकित्सा और स्वास्थ्य संबंधी पाठ्यक्रमों की डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में 376 महिला और 313 पुरुष विद्यार्थियों ने डिग्री हासिल की। उपराष्ट्रपति ने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और प्रमाणपत्र भी प्रदान किए।
उन्होंने कहा कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में नए डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। AIIMS रायपुर जैसे संस्थान केवल विशेषज्ञ तैयार नहीं करते, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी समझने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की नई पीढ़ी भी तैयार करते हैं।
इस लिहाज से AIIMS रायपुर का तीसरा दीक्षांत समारोह सिर्फ विद्यार्थियों के लिए एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में आगे बढ़ते कदमों का भी महत्वपूर्ण पड़ाव बनकर सामने आया।
