Jhiram Valley Naxal Attack: NIA की विशेष अदालत के फैसले पर टिकी थीं पीड़ित परिवारों की निगाहें, 2013 के हमले में 27 लोगों की हुई थी मौत
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और दर्दनाक नक्सली हमलों में शामिल झीरम घाटी नक्सली हमला एक बार फिर चर्चा में है। करीब 13 साल पुराने इस मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। मामले की सुनवाई NIA की विशेष अदालत में हुई। लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले पर प्रदेश ही नहीं, बल्कि झीरम हमले में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों की भी नजर थी।
25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षा से जुड़े लोगों समेत कुल 27 लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया था और छत्तीसगढ़ की राजनीति पर भी इसका गहरा असर पड़ा था।
25 मई 2013 को झीरम घाटी में क्या हुआ था?
झीरम घाटी का नाम छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में पहले से ही संवेदनशील इलाकों में लिया जाता था। 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला इसी क्षेत्र से गुजर रहा था। इसी दौरान नक्सलियों ने काफिले को निशाना बनाते हुए हमला किया।
हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश नेतृत्व के कई प्रमुख चेहरे मारे गए। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों की भी जान गई। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक राजनीतिक यात्रा कुछ ही मिनटों में बड़े नरसंहार में बदल गई थी।
इस हमले के बाद जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती हमले की साजिश और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को सामने लाना था।
NIA ने संभाली मामले की जांच
हमले की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने अपने हाथ में ली थी। जांच आगे बढ़ने के साथ आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और मामला अदालत तक पहुंचा।
मूल रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चला। हालांकि सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। इसके बाद अदालत में 10 आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही आगे बढ़ी। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी माना
अब अदालत के फैसले के बाद मामले में 10 आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। इस फैसले को झीरम घाटी हमले की कानूनी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
रिपोर्ट में जिन दोषियों के नाम बताए गए हैं, उनमें प्रमिला कोडियाम उर्फ ज्योति, बंजामी उर्फ सन्ना, अयाता मरकाम, मुक्का मंडावी, मड़ाकामी देवा, कवासी कोसा, चौतू उर्फ मुन्ना, कोसा कवासी, महादेव नाग और सुमित्रा शामिल हैं। हालांकि मूल रिपोर्ट में अंतिम नाम को लेकर विवरण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, इसलिए अदालत के आधिकारिक आदेश से नामों की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
पीड़ित परिवारों की निगाहें फैसले पर टिकी थीं
झीरम घाटी हमला केवल एक आपराधिक मामला नहीं था। इस घटना ने कई परिवारों को हमेशा के लिए बदल दिया। जिन लोगों ने अपने परिजनों को उस हमले में खोया, उनके लिए अदालत का फैसला लंबे इंतजार के बाद आया है।
13 साल का समय किसी भी परिवार के लिए बहुत लंबा होता है। ऐसे में दोषसिद्धि की खबर से पीड़ित परिवारों को न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद मिली है। हालांकि अदालत के फैसले के बाद भी कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं होती। आगे की कार्रवाई और संभावित अपील की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
झीरम हमले का राजनीतिक असर भी रहा गहरा
झीरम घाटी हमले का असर केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। इस घटना ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को भी गहराई से प्रभावित किया। कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की मौत के कारण प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर पर इसका लंबे समय तक असर दिखाई दिया।
घटना के बाद नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था, राजनीतिक यात्राओं की सुरक्षा और खुफिया तंत्र की भूमिका को लेकर भी कई सवाल उठे थे।
13 साल बाद फैसले से क्या बदलेगा?
अदालत का फैसला इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। दोषियों को सजा कितनी होगी और अदालत के आदेश के बाद मामले में आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी, यह आने वाले चरण में स्पष्ट होगा।
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के इतिहास की उन घटनाओं में शामिल है जिसे प्रदेश कभी नहीं भूल सकता। इतने वर्षों बाद दोषसिद्धि का फैसला सामने आने से एक बार फिर उस घटना की यादें ताजा हो गई हैं।
निष्कर्ष
झीरम घाटी नक्सली हमले के करीब 13 साल बाद 10 आरोपियों का दोषी करार दिया जाना मामले की न्यायिक प्रक्रिया में अहम घटनाक्रम है। 25 मई 2013 के हमले में 27 लोगों की जान गई थी और इसके बाद लंबे समय तक जांच व सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष के 101 गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अदालत ने फैसला सुनाया है।
अब सभी की नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत द्वारा सुनाई जाने वाली सजा पर रहेगी। साथ ही, इस फैसले से उन परिवारों को भी उम्मीद है जिन्होंने वर्षों से न्याय का इंतजार किया है।
