Ayodhya Ram Mandir: 5,500 से ज्यादा आवेदनों के बीच हुआ चयन, ऑपरेशन सिंदूर में निभा चुके हैं अहम भूमिका
अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर से जुड़ी एक बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को अपना पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। ट्रस्ट के इस फैसले को मंदिर प्रशासन को अधिक पेशेवर, व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना में करीब 38 वर्षों तक सेवा दे चुके हैं। वह फाइटर पायलट, टेस्ट पायलट और वरिष्ठ कमांडर के रूप में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। अप्रैल 2026 में सेवानिवृत्त होने से पहले वह वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद पर थे।
5,585 आवेदनों में से हुआ चयन
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए थे। रिपोर्टों के अनुसार करीब 5,585 उम्मीदवारों ने इस पद के लिए आवेदन किया था। स्क्रीनिंग के कई चरणों के बाद उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया और इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी हुई।
आखिरकार जीतेंद्र मिश्रा को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना गया। उनके लंबे सैन्य अनुभव, नेतृत्व क्षमता और बड़े स्तर पर संगठनों और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय करने के अनुभव को उनकी नियुक्ति में महत्वपूर्ण माना गया।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संभाली थी पश्चिमी वायु कमान
जीतेंद्र मिश्रा की पहचान केवल एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के तौर पर नहीं है, बल्कि वह भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण अभियानों से भी जुड़े रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे।
भारतीय वायुसेना में उनकी सेवा के दौरान उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी रहे। PIB के अनुसार उनके पास 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है और उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के विमानों पर उड़ान भरी है।
उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) सहित कई सैन्य सम्मान भी मिल चुके हैं।
अब क्या होगी राम मंदिर CEO की जिम्मेदारी?
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO का पद सामान्य प्रशासनिक पद नहीं माना जा रहा है। अयोध्या में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और आने वाले वर्षों में मंदिर परिसर तथा उससे जुड़ी सुविधाओं का विस्तार भी होना है।
ऐसे में CEO के सामने मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, दैनिक संचालन, वित्तीय प्रबंधन, कर्मचारियों के बीच समन्वय, श्रद्धालुओं की सुविधाएं और अलग-अलग एजेंसियों के साथ तालमेल जैसी कई जिम्मेदारियां होंगी।
मंदिर के विस्तार और अयोध्या के तेजी से विकसित होते धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरने के साथ प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत रखना भी बड़ी चुनौती होगी।
दान से जुड़े विवाद के बीच बड़ा प्रशासनिक बदलाव
जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब राम मंदिर ट्रस्ट प्रशासन हाल में सामने आए दान से जुड़े कथित गबन/चोरी के विवाद के कारण चर्चा में रहा है। इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई थीं और ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने जून में इस्तीफा दिया था।
ऐसे माहौल में एक पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और वित्तीय तथा संचालन संबंधी प्रक्रियाओं में जवाबदेही बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों की भी एंट्री
CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट ने तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया है। इनमें मदन मोहन पांडे, महेश भगचंदका और निर्मला यादव के नाम शामिल हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?
राम मंदिर अब केवल निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं है। मंदिर में नियमित दर्शन, श्रद्धालुओं की भारी भीड़, सुरक्षा, सुविधाओं का संचालन और भविष्य में होने वाले विकास कार्यों के कारण इसका प्रशासन लगातार बड़ा और जटिल होता जा रहा है।
ऐसे में सैन्य पृष्ठभूमि वाले अनुभवी अधिकारी को CEO बनाना ट्रस्ट की प्रशासनिक सोच में बदलाव का संकेत माना जा रहा है। अब देखना होगा कि जीतेंद्र मिश्रा अपने सैन्य अनुभव और प्रबंधन क्षमता का इस्तेमाल राम मंदिर की व्यवस्था को किस तरह नया स्वरूप देने में करते हैं।
