नई दिल्ली: केंद्र सरकार में संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा शुरू कर दी है। सोमवार को हुई बैठक में सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, मंत्रालयों की प्रगति और मंत्रियों की जवाबदेही पर सीधे चर्चा हुई। इस पूरी कवायद को संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि सरकार की ओर से अभी तक फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
मंत्रियों से पूछा गया काम का हिसाब
बैठक में मंत्रियों से उनके विभाग के कामकाज और आगे की योजनाओं को लेकर जानकारी ली गई। रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से अगले पांच साल के रोडमैप के साथ-साथ 2047 के लक्ष्य को लेकर उनकी तैयारी के बारे में भी सवाल किए।
मंत्रियों के काम का आकलन केवल मंत्रालय की योजनाओं तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता और जनता तक सरकार के काम की जानकारी पहुंचाने के तरीके को भी समीक्षा का हिस्सा बनाया गया।
शिक्षा, कृषि और सामाजिक न्याय पर खास नजर
शुरुआती समीक्षा में शिक्षा मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से जुड़े कामकाज पर विशेष ध्यान रहा। इन विभागों की योजनाओं की प्रगति, जमीन पर उनके क्रियान्वयन और निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने की स्थिति पर चर्चा की गई।
सामाजिक न्याय, आदिवासी कल्याण, युवा और शिक्षा जैसे मुद्दों को भी बैठक में प्रमुखता मिलने की जानकारी सामने आई है। सरकार की कोशिश यह देखने की है कि जिन योजनाओं को लेकर लक्ष्य तय किए गए हैं, उनका असर वास्तव में लोगों तक कितनी तेजी से पहुंच रहा है।
कैबिनेट फेरबदल से क्यों जोड़ी जा रही बैठक?
मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा ऐसे समय हो रही है, जब केंद्र सरकार में संभावित कैबिनेट विस्तार और फेरबदल को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। इससे पहले भी अलग-अलग रिपोर्टों में नए चेहरों को सरकार में शामिल करने और कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव की अटकलें सामने आती रही हैं। हालांकि, इन चर्चाओं पर केंद्र सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
समीक्षा की प्रक्रिया आगे भी जारी रहने की संभावना है। सरकार अलग-अलग मंत्रालयों और मंत्रियों के कामकाज को चरणबद्ध तरीके से देख सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों और उनमें सामने आने वाले आकलन पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।
अभी फेरबदल पर कोई फैसला नहीं
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि समीक्षा के आधार पर किस मंत्री का विभाग बदलेगा या किसे मंत्रिमंडल से बाहर किया जाएगा। समीक्षा बैठक और कैबिनेट फेरबदल के बीच संबंध की चर्चा जरूर है, लेकिन अंतिम फैसला प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व के स्तर पर ही होगा।
इसलिए फिलहाल तस्वीर इतनी साफ है कि मोदी सरकार मंत्रियों के कामकाज और योजनाओं के जमीनी असर का आकलन कर रही है। आने वाले दिनों में होने वाली समीक्षा बैठकों से यह संकेत मिल सकता है कि सरकार के स्तर पर किन विभागों और मंत्रियों के प्रदर्शन को लेकर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
